इटारसी। आदिवासी ब्लॉक केसला के ग्राम छीतापुरा में आदिवासी संस्कृति और रीति-रिवाजों के संरक्षण हेतु सात दिवसीय कोयापूनेम धर्म दर्शन गोंडी गाथा का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के पहले दिन गुरुवार को कलश यात्रा निकाली और बड़ादेव फडापेन की स्थापना की गई।
सांस्कृतिक जड़ों को बचाने की मुहिम
इस आयोजन में सिवनी जिले के प्रसिद्ध राष्ट्रीय पूनेमचार्य शंकर शाह इरपाचे मुख्य वक्ता के रूप में पधारे हैं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज को अपनी मूल संस्कृति, वेशभूषा और देव-व्यवस्था से जोडऩा है। समाजसेवी विनोद वारिवा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में समाज के लोग अपनी जड़ों और देवी-देवताओं को भूलकर धर्म परिवर्तन की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे रोकने के लिए समाज को एकजुट करना आवश्यक है।
7 दिनों का विस्तृत कार्यक्रम
- 9 जनवरी : जीव-जगत की उत्पत्ति।
- 10 जनवरी : पहांदी पारी कुपारी लिंगों गाथा।
- 11 जनवरी : कली कंकाली दाई जन्म उत्सव।
- 12 जनवरी : तैंतीस कोटि बच्चों की गाथा।
- 13 जनवरी : गोत्र व्यवस्था एवं देव बंटवारा।
- 14 जनवरी : ग्राम देवी-देवता गाथा एवं धूपपारा (समापन)।
इस धार्मिक आयोजन में नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। समाज के कार्यकर्ताओं ने सभी स्वजातीय बंधुओं से अपनी गौरवशाली संस्कृति को बचाने हेतु इस गाथा में सम्मिलित होने की अपील की है।








