सुखतवा/इटारसी। कहते हैं कि स्वस्थ मन में ही स्वस्थ शरीर बसता है, लेकिन आज की भागदौड़ में तनाव बिन बुलाए मेहमान की तरह छात्र जीवन में घुस आता है। इसी टेंशन को ‘टा-टा’ कहने और डिजिटल युग में सेहत को स्मार्ट बनाने के लिए आज भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय में एक अनूठी कार्यशाला सजी। डीटीएफ और मानसिक स्वास्थ्य क्लब के इस मंच पर विद्यार्थियों ने जाना कि अपनी हेल्थ को जेब में (मोबाइल में) कैसे रखें और दिमाग को ‘कूल’ कैसे बनाएं।
आभा आईडी : सेहत का ‘ऑल-इन-वन’ लॉकर
कार्यशाला में सुश्री जोशलिन कुजूर और प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने बड़े दिलचस्प अंदाज में आभा आईडी का राज खोला। उन्होंने बताया कि यह आईडी आपकी बीमारी से लेकर इलाज तक का ऐसा डिजिटल चिट्ठा है, जिसके बाद आपको भारी-भरकम फाइलें ढोने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- फायदा : डॉक्टर कहीं भी हो, आपकी मेडिकल हिस्ट्री एक क्लिक पर उसके सामने होगी।
- सुविधा : श्रीमती कामधेनु पटोदिया ने समझाया कि बीमा क्लेम और कैशलेस इलाज में यह आईडी जादुई कार्ड से कम नहीं है।
तनाव को कहें ‘गुडबाय’
विद्यार्थी जीवन में परीक्षाओं और करियर का बोझ अक्सर मानसिक थकान देता है। उन्नति फाउंडेशन के कार्तिक रत्नानी ने एक मेंटर की भूमिका निभाते हुए छात्रों को संतुलित जीवनशैली और टाइम मैनेजमेंट के गुरु मंत्र दिए। उन्होंने छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि कैसे छोटी-छोटी आदतों को बदलकर बड़े तनाव को हराया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज ने अपनी वाकपटुता से किया, वहीं डीटीएफ प्रभारी डॉ. सौरभ तिवारी ने सभी का आभार जताते हुए इस ज्ञानवर्धक सत्र का समापन किया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और महाविद्यालयीन स्टाफ मौजूद रहा।








