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जनवरी आधा बीता पर गायब है तीखी ठंड, मावठे की बूंद को तरसी सूखी धरती

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इटारसी। जनवरी का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन जिले के निवासी और किसान अभी भी उस कड़ाके की ठंड और अमृत रूपी मावठे का इंतजार कर रहे हैं जो इस समय तक सामान्यत: अपनी दस्तक दे देता है। जिले के पर्यटन स्थल पचमढ़ी को छोड़ दें, तो शेष मैदानी इलाकों में पारा उस स्तर तक नहीं गिरा है जिससे सर्दी का तीखापन महसूस हो सके।

फसलों के लिए अमृत का इंतजार

दिसंबर और जनवरी के शुरुआती पखवाड़े में होने वाली मावठे की बारिश रबी की फसलों विशेषकर गेहूं और चने के लिए खाद से भी ज्यादा कीमती मानी जाती है।

  • अमृत की कमी : इस बार मावठे की एक बूंद भी धरती पर नहीं गिरी है, जिससे किसान फसल की पैदावार को लेकर चिंतित हैं।
  • सूखी हवाएं : हवा में नमी की कमी के कारण फसलें उस तरह से नहीं फल-फूल पा रही हैं जैसा कि अपेक्षित ठंड और नमी में होता है।

भोपाल में सर्दी, पर नर्मदापुरम में उम्मीदें टूटीं

आश्चर्यजनक रूप से, प्रदेश की राजधानी भोपाल और पड़ोसी जिलों में पारा तेजी से नीचे खिसका है और वहां अच्छी सर्दी पड़ रही है। इसके विपरीत, नर्मदापुरम में मौसम विभाग के तमाम अनुमानों के बावजूद अपेक्षित ठंड का अभाव है। केवल पचमढ़ी में ही पारा न्यूनतम स्तर पर बना हुआ है, जबकि जिले के अन्य हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है।

सेहत पर भारी पड़ती शुष्क हवाएं

हवा में नमी का स्तर कम होने और तापमान में उतार-चढ़ाव का सीधा असर आमजन की सेहत पर पड़ रहा है।

  • बीमारियों का खतरा : शुष्क हवाओं और प्रदूषण के कणों के कारण सांस के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों में सर्दी-खांसी और एलर्जी की समस्याएं बढ़ रही हैं।
  • विशेषज्ञों की राय : डॉक्टरों का मानना है कि यदि अच्छी ठंड और एक बार बारिश हो जाए, तो हवा साफ होगी और संक्रमण के खतरे कम होंगे।

मौसम विभाग के अनुसार क्या है कारण?

आईएमडी के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मावठा नहीं बरसने के पीछे मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) का सक्रिय न होना या उसका उत्तर भारत तक ही सीमित रह जाना है।

  • पश्चिमी विक्षोभ की कमी : सामान्यत: अरब सागर से उठने वाली नमी वाली हवाएं इस समय तक मध्य भारत में सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन इस वर्ष इनका प्रभाव कमजोर रहा है।
  • तापमान का चक्र : स्थानीय कारकों और भौगोलिक स्थिति के कारण भी नर्मदापुरम में सर्दी का वह असर नहीं दिख रहा है जो पड़ोसी जिलों में है।

यदि आने वाले एक सप्ताह में मौसम के रुख में बदलाव नहीं होता और मावठा नहीं बरसता, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और जल स्तर पर पड़ सकता है। फिलहाल, नर्मदापुरम की जनता बादलों की ओर टकटकी लगाए बैठी है।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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