रितेश राठौर, केसला। नर्मदापुरम जिले के आदिवासी विकासखंड केसला में शुक्रवार को जल-जंगल और जमीन के हक की गूंज सुनाई दी। दो दर्जन से अधिक गांवों के आदिवासियों, किसानों और मजदूरों ने प्रदेश व केंद्र सरकार की नीतियों और वन विभाग की कथित मनमानी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर तीखा विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
जन-संगठनों की संयुक्त हुंकार
समाजवादी जन परिषद, किसान आदिवासी संगठन, किसान मजदूर परिषद और सतपुड़ा महिला संगठन के संयुक्त तत्वावधान में दोपहर 12 बजे सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण ‘आम के बगीचे’ के पास एकत्र हुए। यहां से शुरू हुई आक्रोश रैली कस्बे के प्रमुख मार्गों—बाजार मोहल्ला, थाना चौक और आजाद मोहल्ला होते हुए जनपद पंचायत कार्यालय पहुंची। प्रदर्शन के दौरान “गरीबों की जमीन छीनना बंद करो” और “वन अधिकार पट्टे दो” जैसे नारों से पूरा कस्बा गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपा।
आदिवासियों की मुख्य मांगें
- वन विभाग की मनमानी: पिपरिया कला ग्राम पंचायत में पदस्थ वनकर्मी मनोज देवड़ा पर ग्रामीणों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है।
- जमीन का मुआवजा: चांदकिया के उन किसानों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की गई है, जिनकी जमीन जलाशय परियोजना की भेंट चढ़ गई।
- वनाधिकार पट्टे: वन अधिकार कानून के तहत लंबित दावों का निराकरण कर पात्र आदिवासियों को पट्टे देने की पुरजोर मांग उठाई गई।
गीतों के जरिए विरोध और प्रशासन का आश्वासन
जनपद कार्यालय पहुंचने पर व्यवस्थाओं की कमी भी उजागर हुई। पीने के पानी के इंतजाम न होने पर ग्रामीणों ने खुद हैंडपंप से प्यास बुझाई और क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से शासन के प्रति अपना रोष प्रकट किया।
किसान मजदूर परिषद के प्रतिनिधि फागराम ने ज्ञापन का वाचन किया। मौके पर मौजूद तहसीलदार ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उचित माध्यम से शासन तक भेज दिया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यह तो बस शुरुआत है। अगर एक हफ्ते में हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आदिवासी समाज अपने हक के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ने को मजबूर होगा।









