इटारसी। ग्राम तवानगर के शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आज वैराग्य के प्रतीक जड़भरत की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास पं. सौरभ दुबे बिछुआ वाले ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीव जब तक सांसारिक मोह-माया में फंसा रहता है, तब तक उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती।
महाराज ने जड़भरत के प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि कैसे एक मृग के मोह के कारण राजा भरत को पुनर्जन्म लेना पड़ा। उन्होंने शिक्षा दी कि भक्ति के मार्ग में आसक्ति ही सबसे बड़ी बाधा है। आज की कथा में भजनों पर भक्त जमकर झूमते नजर आए।
इस अवसर पर शिव मंदिर सेवा समिति और समस्त ग्रामवासियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा का श्रवण किया और अंत में आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक जारी है।








