इटारसी। शासकीय महात्मा गांधी स्मृति स्नातकोत्तर महाविद्यालय में समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण, एकीकृत दृष्टिकोण विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का गरिमामय आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
ऊर्जा चक्र और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
महाविद्यालय की प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. राकेश मेहता ने अपने स्वागत उद्बोधन में स्वास्थ्य के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव शरीर के सात चक्र ऊर्जा प्रवाह को नियंत्रित करते हैं, जिन्हें योग, ध्यान और सचेतन जीवनशैली से संतुलित कर भावनात्मक स्थिरता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और नवीन शिक्षा नीति के उद्देश्यों पर भी चर्चा की।
शोध पत्रिका भारतीय ज्ञान परंपरा का विमोचन
कार्यशाला के दौरान अतिथियों द्वारा शोध पत्रिका भारतीय ज्ञान परंपरा का विमोचन किया। जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन ने शासन की स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देते हुए अध्यात्म और योग को स्वस्थ समाज की आधारशिला बताया।
वैश्विक खुशहाली और चुनौतियां
डॉ. अमरीश त्रिपाठी लखनऊ विश्वविद्यालय ने मुख्य वक्ता के रूप में फिनलैंड जैसे खुशहाल देशों का उदाहरण देते हुए समाज के प्रति युवा पीढ़ी के उत्तरदायित्वों को रेखांकित किया। डॉ. शशांक शेखर बीयू भोपाल ने भारत के पारंपरिक ज्ञान को प्रभावशाली बताते हुए स्वच्छता और मानसिक स्वास्थ्य को नैतिक कर्तव्य बताया।
डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के हवाले से महिलाओं में एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने जंक फूड को कम आयु का मुख्य कारण बताया। डॉ. सुसन मनोहर संयोजक ने समग्र स्वास्थ्य के 8 महत्वपूर्ण पहलुओं और सरकारी योजनाओं की तकनीकी जानकारी साझा की।
कुरीतियों की समाप्ति का संकल्प
कार्यक्रम की संयोजक सचिव डॉ. अर्चना शर्मा ने लिंग भेद जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने शिक्षा को सबसे सशक्त माध्यम बताया और आभार व्यक्त किया। संचालन संस्कृत विभागाध्यक्ष श्रीमती श्रुति ने किया। इस अवसर पर प्रो. अरविंद शर्मा, डॉ. रश्मि तिवारी, डॉ. पीके अग्रवाल, डॉ. सोनू चौरे, डॉ. सत्यनारायण बस्सा, डॉ. ओपी शर्मा, श्रीमती सुशीला बरबड़े सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।









