इटारसी। समय की गति जब डिजिटल क्रांति के शोर में स्मृतियों को धुंधला करने लगती है, तब साहित्य ही वह सेतु बनता है जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। इटारसी के एमजीएम महाविद्यालय में बसंत पंचमी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के पावन अवसर पर एक ऐसी ही वैचारिक और काव्यात्मक सरिता बही, जहां ज्ञान और वीरता का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में कार्यक्रम हुआ।
विस्मृति के विरुद्ध स्मृति का संघर्ष
कार्यक्रम में कवि राजेंद्र मालवीय का कविता पाठ मात्र शब्दों का चयन नहीं, बल्कि एक युग का विलाप था। उनकी कविता पोस्टकार्ड का दर्द ने डिजिटल युग की निर्जीवता पर प्रहार करते हुए उस दौर को जीवित किया, जब कागज के एक टुकड़े में संवेदनाएं धड़कती थीं। यह कविता हमें याद दिलाती है कि तकनीक ने भले ही संचार की गति बढ़ा दी हो, लेकिन उस प्रतीक्षा के धैर्य और शब्दों की उस मिठास को छीन लिया है जो अंतर्देशीय पत्रों में रची-बसी थी।
प्रकृति और सत्ता का बोध
प्राचार्य डॉ. राकेश मेहता ने केदारनाथ अग्रवाल की अमर पंक्तियों हवा हूं मैं, बसंती हवा हूं, के माध्यम से प्रकृति के उल्लास को स्वर दिया। उनका वाचन दार्शनिक संकेत था कि वसंत केवल ऋतु परिवर्तन नहीं, बल्कि जड़ता के विरुद्ध नव-सृजन का आह्वान है। महेश मूलचंदानी ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से व्यवस्था की विसंगतियों—भ्रष्टाचार, दहेज और सामाजिक गिरावट—पर तीखे प्रहार किए। कुत्तों की वफादारी और मनुष्य की कथित हरामखोरी के बीच का अंतर दिखाकर उन्होंने मानवता के गिरते नैतिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया।
नारी शक्ति और वैचारिक आलोक
श्रीमती ममता वाजपेयी ने मां सरस्वती की वंदना करते हुए अभिमान से स्वाभिमान की यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी पंक्तियां मनुष्य को आत्म-साक्षात्कार के लिए प्रेरित करती हैं, जो दर्शन का मूल आधार है। सुनील वाजपेयी: ने अपनी रचना ओस की बूंद सी बेटियां के माध्यम से समाज की संवेदनशीलता को झकझोरा।
मुख्य अतिथि डॉ. नीरज जैन अध्यक्ष, जनभागीदारी समिति मौजूद रहे। विशेष वक्ता डॉ. ओपी शर्मा, इतिहास विभाग ने नेताजी के योगदान पर प्रकाश डाला। संचालन श्रीमती श्रुति संस्कृत विभाग एवं डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने किया। आमंत्रित कवियों का शाल-श्रीफल एवं बुके से सम्मान कर भारतीय अतिथि परम्परा का निर्वहन किया गया। छात्राओं के सामूहिक नृत्य ने शैक्षणिक वातावरण में कलात्मक रंग भर दिए। डॉ. रश्मि तिवारी और डॉ. अर्चना शर्मा का सहयोग इस आयोजन को सफल बनाने में मील का पत्थर साबित हुआ।









