सुखतवा/केसला। जब पैरों में बंधे घुंघरुओं की थाप और हाथों की मुद्राओं से चौका और त्रिभंगी की आकृति उभरती है, तो मानों साक्षात भगवान जगन्नाथ का दरबार उतर आता है। कुछ ऐसा ही आध्यात्मिक और मनमोहक नजारा भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में देखने को मिला, जहां भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत स्पीक मैके इटारसी चैप्टर के तत्वावधान में कोलकाता की सुप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना लावण्या घोष ने अपनी कला की प्रस्तुति दी।
नृत्य : आत्मा से परमात्मा का मिलन
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत और अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर डॉ. राजपूत ने बेहद दार्शनिक भाव से कहा, नृत्य केवल देह की गति नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार का एक पवित्र माध्यम है। यह हमें प्रकृति और अपनी भावनाओं से गहराई से जोड़ता है।
जब मंच पर जीवंत हुए नवरस
नृत्यांगना लावण्या घोष ने अपनी प्रस्तुति का आरंभ राधा-कृष्ण की वंदना से किया। उनकी भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि उन्होंने केवल प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि विद्यार्थियों को वर्कशॉप के जरिए ओडिसी की बारीकियां भी सिखाईं।

- मुद्राओं का ज्ञान : विद्यार्थियों ने शरीर की थिरकन, चेहरे के भाव और हस्त मुद्राओं के जरिए हवा, लहरों, पानी और विभिन्न प्राणियों के स्वभाव को अभिव्यक्त करना सीखा।
- नवरसों का चित्रण : श्रृंगार, हास्य, क्रोध, भय और शांति जैसे नवरसों का सजीव चित्रण कर उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शक्ति का परिचय दिया।
युवा पीढ़ी को विरासत से जोडऩे का प्रयास
स्पीक मैके समन्वयक सुनील बाजपेई के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩा था। अंत में, महाविद्यालय परिवार द्वारा लावण्या घोष को शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस सांस्कृतिक उत्सव में डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज, डॉ. प्रवीण कुशवाहा, सुश्री जोसलिन कुजूर, श्रीमती संध्या उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संचालन डॉ. सौरभ तिवारी ने किया और आभार डॉ. सतीश ठाकरे ने व्यक्त किया।









