केसला। जिला मुख्यालय से सटे केसला ब्लॉक के ग्राम छीतापुरा में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। यहां लंबे समय से अपनी मूल जड़ों से दूर रहे 55 आदिवासी परिवारों ने ईसाई मत त्याग कर पुन: सनातन धर्म की मुख्यधारा में घर वापसी की है।
संवाद और रामकथा से बदली सोच
क्षेत्र में धर्मांतरण की चुनौतियों के बीच यह परिवर्तन अचानक नहीं आया। इसके पीछे भिलट देव धाम के महंत गोविंददास के सतत प्रयास और संवाद की बड़ी भूमिका रही। महंत ने गांव में पहुंचकर परिवारों से व्यक्तिगत चर्चा की और उनकी सामाजिक व धार्मिक चिंताओं को दूर कर विश्वास बहाली का कार्य किया। इसी अभियान के तहत गांव में पांच दिवसीय भव्य रामकथा का आयोजन किया, जिसने ग्रामीणों को सांस्कृतिक मूल्यों से पुन: जोड़ा।
विधिवत आयोजन और पवित्र स्नान
रामकथा के समापन अवसर पर एक विशेष शुद्धि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सभी परिवारों को गंगा जल और नर्मदा जल का आचमन कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत सनातनी परंपरा में उनकी वापसी कराई गई। सामूहिक कीर्तन और सहभोज का आयोजन हुआ, जिसमें सभी वर्गों ने साथ बैठकर भोजन कर ऊंच-नीच और भेदभाव मिटाने का संकल्प लिया।
टकराव नहीं, संवाद है समाधान
मीडिया से चर्चा करते हुए महंत गोविंददास ने स्पष्ट किया कि धर्मांतरण का समाधान टकराव में नहीं, बल्कि संवाद और सांस्कृतिक जागरूकता में है। हमारा उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि लोगों को उनकी मूल पहचान, परंपरा और गौरवशाली संस्कृति से जोडऩा है। यह अभियान सामाजिक एकता के लिए निरंतर जारी रहेगा।
सामाजिक सौहार्द्र का नया उदाहरण
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस पहल से गांव में आपसी भाईचारे को मजबूती मिली है। जिन परिवारों ने घर वापसी की है, वे अब समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बनकर गांव के विकास में योगदान देने के लिए उत्साहित हैं। क्षेत्र के प्रबुद्धजनों ने इसे सामाजिक समरसता की दिशा में एक मील का पत्थर करार दिया है।









