इटारसी। सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी देने में कोताही और आयोग के आदेशों की अनदेखी करना नर्मदापुरम के अपर कलेक्टर (लोक सूचना अधिकारी) को भारी पड़ गया है। राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए अपर कलेक्टर को 25,000 रुपए का जुर्माना लगाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरा मामला?
आरटीआई एक्टिविस्ट और कांग्रेस नेता अमोल उपाध्याय ने कलेक्टर कार्यालय नर्मदापुरम के विरुद्ध राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई थी। इस मामले में 11 दिसंबर 2025 को आयोग ने जानकारी उपलब्ध कराने के स्पष्ट आदेश दिए थे।
आयोग की सख्त टिप्पणी, गैर-जिम्मेदाराना रवैया
16 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त डॉ. वंदना गांधी ने पाया कि आयोग के पिछले आदेश का पालन नहीं किया गया। आदेश में आयुक्त ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोक सूचना अधिकारी (अपर कलेक्टर) द्वारा गैर-जिम्मेदाराना तरीके से पदीय कर्तव्यों का निर्वहन किया जा रहा है। आयोग ने आदेश की अवहेलना पर घोर नाराजी व्यक्त की है।
धारा 20 के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी
सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 के अंतर्गत जारी इस नोटिस में आयोग ने पूछा है कि क्यों न उन पर 25 हजार रुपये की शास्ति (जुर्माना) अधिरोपित की जाए और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाए।
कलेक्टर सुनिश्चित करेंगे नोटिस की तामीली
आयोग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आयुक्त ने इस कारण बताओ नोटिस की तामीली प्रथम अपीलीय अधिकारी यानी कलेक्टर नर्मदापुरम के माध्यम से सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। इसका अर्थ है कि अब जिला प्रमुख को अपने अधीनस्थ अधिकारी की इस लापरवाही पर जवाबदेही तय करनी होगी।









