- तीरंदाजी की नेशनल प्लेयर कीर्ति ने ‘मामा’ शिवराज से मांगी मदद
इटारसी। खेल के मैदान में लक्ष्य पर सटीक निशाना साधने वाली एक बेटी आज अपनी जिंदगी और करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। यह कहानी है नर्मदापुरम के डोलरिया तहसील स्थित ग्राम भीलाखेड़ी की कुमारी कीर्ति यादव की, जिसने मुफलिसी और अभावों के बीच धनुष उठाकर राष्ट्रीय स्तर तक तिरंगे का मान बढ़ाया है। लेकिन अब उसके हौसलों के आगे गरीबी की दीवार ऊंची होती जा रही है।
बिना आधुनिक धनुष के जीत रही है जंग
कीर्ति के पिता दीनदयाल यादव एक अति आर्थिक कमजोर परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार बेटी को संसाधन दिलाए, लेकिन तीरंदाजी जैसे महंगे खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के उपकरण लाखों के आते हैं। परिवार पर बुजुर्ग दादी और दो छोटे भाई-बहनों की भी जिम्मेदारी है, जिसके चलते पिता अब आधुनिक और महंगे उपकरण दिलाने में असमर्थ हैं।
कीर्ति का पत्र बयां करता है दर्द : आधुनिक संसाधनों की कमी के कारण मैं अपनी प्रतियोगिता में कौशल क्षमता के अनुसार पूरी दक्षता का प्रदर्शन नहीं कर पा रही हूं।
उपलब्धियों का तरकश है पदकों से भरा
बिना आधुनिक सुविधाओं के भी कीर्ति ने जो कर दिखाया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनके शानदार प्रदर्शन की लिस्ट लंबी है।
- गोल्ड मेडल : खेलो एमपी यूथ गेम्स (जबलपुर) में मिक्स्ड टीम इवेंट में स्वर्ण
- ब्रोंज मेडल : ऑल इंडिया इंटर साई टूर्नामेंट कोलकाता में कांस्य पदक
- नेशनल रैंकिंग : जयपुर में आयोजित विमेन हृक्र्रञ्ज में दूसरा और भोपाल में तीसरा स्थान
- सिल्वर मेडल : जूनियर स्टेट जबलपुर और स्कूल स्टेट इटारसी में दूसरा स्थान प्राप्त किया
- राष्ट्रीय सहभागिता : रांची झारखंड में आयोजित 69वें स्कूल नेशनल और अरुणाचल प्रदेश में सब-जूनियर नेशनल में हिस्सा लिया
उम्मीद की आखिरी किरण मामा शिवराज
प्रशासनिक और प्रदेश स्तर पर कोई ठोस मदद न मिलने के बाद, अब कीर्ति ने देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। कीर्ति को उम्मीद है कि बेटियों की परवाह करने वाले मामाजी उसकी आवाज सुनेंगे और उसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।
क्या सिस्टम सुनेगा गुहार
एक तरफ सरकार बेटियों को आगे बढ़ाने का दावा करती है, वहीं कीर्ति जैसी नेशनल प्लेयर आज संसाधनों के लिए गुहार लगा रही है। क्या इस प्रतिभावान खिलाड़ी को समय पर सहायता मिलेगी, या एक और प्रतिभा गुमनामी के अंधेरे में खो जाएगी।









