इटारसी। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन के साझा प्रयासों से रेलवे कर्मचारियों के हित में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। हाल ही में रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली में एनएफआईआर के संयुक्त महामंत्री अशोक शर्मा और रेलवे बोर्ड के एडिशनल मेंबर (ट्रैक्शन) सोमेश कुमार के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर सहमति बनी है।
500 प्रशिक्षुओं की तत्काल नियुक्ति
बैठक में जबलपुर जोन के रनिंग स्टाफ से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। संघ की मांग पर रनिंग स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए तत्काल 500 प्रशिक्षुओं को असिस्टेंट लोको पायलट की ट्रेनिंग हेतु भेजने का निर्णय लिया है। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी सहमति बनी है।
- पदोन्नति : असिस्टेंट लोको पायलट से लोको पायलट गुड्स के पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया तेज होगी।
- कार्य दशाएं : वर्किंग आवर्स (काम के घंटे) में सुधार और रनिंग स्टाफ के पदों में बढ़ोतरी पर विस्तृत चर्चा हुई।
- माइलेज संतुलन : अन्य रेलवे और डिवीजनों के साथ माइलेज के संतुलन को लेकर ठोस पहल शुरू की गई है।
ट्रैक मेंटेनरों के लिए ऐतिहासिक राहत
रेलवे की रीढ़ कहे जाने वाले ट्रैक मेंटेनरों के लिए डीसीजीसीएम की बैठक में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले इन कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है।
- रेस्ट पाइंट की व्यवस्था : गर्मियों के दौरान अधिकतम स्थानों पर रेस्ट पाइंट बनाए जाएंगे।
- बुनियादी सुविधाएं : प्रत्येक रेस्ट पॉइंट पर लाइट, पंखा और हर यूनिट के लिए 20 लीटर पानी का कैंपर उपलब्ध कराया जाएगा।
- व्यक्तिगत सुविधा : प्रत्येक ट्रैक मेंटेनर को 2 लीटर पानी की व्यक्तिगत बोतल भी प्रदान की जाएगी।
संघ का संकल्प : संवाद से समाधान
संगठन के महामंत्री अशोक शर्मा ने कहा कि कर्मचारी हित हमारे लिए सर्वोपरि है। यह निर्णय न केवल कार्य परिस्थितियों में सुधार लाएंगे, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होंगे। संघ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संवाद से ही समाधान निकलता है और वे रनिंग स्टाफ के प्रत्येक अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।










