रितेश राठौर, केसला। ब्लॉक के ग्राम हिरनचापड़ा में निर्माणाधीन आंगनवाड़ी भवन की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को आंगनवाड़ी की छत ढलाई के लिए लोहा बांधने का काम चल रहा था, जिसे ग्रामीणों ने घटिया सामग्री और मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए रुकवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वे बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
लोहे की मोटाई पर विवाद
मौके पर पहुंचे ग्रामीण बंटी और अन्य साथियों ने आरोप लगाया कि छत के जाल में तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि मजबूती के लिए 10 एमएम की रॉड लगाई जानी चाहिए, जबकि ठेकेदार द्वारा 8 एमएम की पतली रॉड का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि इससे छत कमजोर रहेगी और भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
8 साल में ही जर्जर हो गया पिछला भवन
ग्रामीणों के आक्रोश की एक बड़ी वजह पिछला कड़वा अनुभव भी है। उन्होंने बताया कि पूर्व में बना आंगनवाड़ी भवन खराब गुणवत्ता के कारण मात्र 8-10 साल में ही पूरी तरह जर्जर हो गया। स्थिति इतनी खराब है कि अब वहां बच्चों को नहीं भेजा जाता। ग्रामीण नहीं चाहते कि नया भवन भी उसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए।
इंजीनियर का पक्ष : इंजीनियर मगरदे का कहना है कि लोहा तकनीकी मापदंडों के अनुसार ही बांधा गया है, लेकिन ग्रामीणों को तकनीकी बारीकियों की जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि बांधने के तरीके में कुछ कमी थी जिसे दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने मौके पर लोहा बढ़ाने की बात भी कही।
काम नहीं करने देने की चेतावनी
ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि जब तक गुणवत्ता में सुधार नहीं किया जाता और उनकी मांगों के अनुरूप कार्य नहीं होता, तब तक वे निर्माण कार्य शुरू नहीं होने देंगे। ग्रामीण उच्चाधिकारियों से इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कभी यहां न तो सरपंच काम देखने आते हैं और ना ही पंचायत सचिव गुणवत्ता देखने आते हैं।
इंजीनियर की दो-टूक : मैं लिखित में देने को तैयार हूं
छत के जाल में लोहे की गुणवत्ता और मोटाई को लेकर ग्रामीण लगातार सवाल उठा रहे थे। इस विरोध के बीच इंजीनियर रोहित यादव मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों से चर्चा के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य का बचाव किया। जब ग्रामीणों ने मजबूती पर संदेह जताया, तो इंजीनियर रोहित यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि— काम मापदंडों के अनुसार सही हो रहा है और मैं इस बात को लिखित में देने के लिए तैयार हूं।
पंचायत प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे मामले में सरपंच श्रीमती रामकली सेलुकर और सचिव वीर नारायण यादव की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिससे ग्रामीणों में संदेह और बढ़ गया है। ग्रामीण अब इस मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाकर जांच की मांग कर रहे हैं।









