- अनहोनी की आशंका से स्कूल संचालक और अभिभावक परेशान
इटारसी। होली के पर्व पर शासन द्वारा घोषित अवकाश को लेकर शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच भारी असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है। सरकारी कैलेंडर के अनुसार 3 मार्च को होली का अवकाश घोषित किया गया है, जबकि स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार रंगों वाली होली (धुलेंडी) 4 मार्च को मनाई जाएगी। शासन की इस विसंगति ने स्कूल संचालकों और छात्र-छात्राओं को हैरत में डाल दिया है।
गलत दिन अवकाश, जोखिम में बच्चे
स्कूल संचालकों का कहना है कि 3 मार्च को जब रंग नहीं खेला जाना है, तब शासन ने छुट्टी घोषित की है। वहीं, 4 मार्च को जब पूरे क्षेत्र में उत्साह के साथ रंग खेला जाएगा और सड़कों पर हुड़दंगियों की टोलियां होंगी, उस दिन स्कूल खुले रखने का आदेश है। ऐसे में स्कूल आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं के साथ कोई भी अप्रिय या अनहोनी घटना घट सकती है।
अभिभावकों की चिंता, सुरक्षा का सवाल
अभिभावकों का तर्क है कि रंगों वाली होली के दिन सड़कों पर आवागमन असुरक्षित रहता है। विशेषकर छोटे बच्चों को वैन या बस से स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है। यदि शासन अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करता, तो उस दिन उपस्थिति न के बराबर रहने की संभावना है।
4 मार्च को घोषित हो जनहित में अवकाश
स्कूल संचालकों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने स्थानीय प्रशासन और प्रदेश सरकार से पुरजोर मांग की है कि 3 मार्च को घोषित अवकाश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए, जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 4 मार्च को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। शासन को स्थानीय परिस्थितियों और वास्तविक त्योहार की तिथि पर विचार करना चाहिए। बिना रंग वाले दिन छुट्टी देने का कोई औचित्य नहीं है, जबकि मुख्य पर्व के दिन बच्चों की सुरक्षा दांव पर रहेगी।









