इटारसी। भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ और विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्राचीन भारतीय विज्ञान की शक्ति और आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
प्राचीन ऋषियों की देन है आधुनिक विज्ञान
मुख्य वक्ता डॉ. नीता राजपूत ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया को ज्ञान और विज्ञान का वास्तविक परिचय भारत ने ही दिया है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्राचीन काल में ही भारतीय आचार्यों ने रसायन, गणित, अर्थशास्त्र और मेडिकल साइंस जैसे क्षेत्रों में अद्भुत खोजें कर ली थीं, जिनका अनुकरण आज पूरी दुनिया कर रही है।
डॉ. सौरभ तिवारी ने चिकित्सा विज्ञान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत के महर्षि सुश्रुत ही प्रथम शल्य चिकित्सक, प्लास्टिक सर्जरी और एनेस्थीसिया के जन्मदाता हैं। डॉ. महेंद्र सिंह चौधरी ने जगदीश चंद्र बोस के योगदान और उनके द्वारा आविष्कृत क्रेस्कोग्राफ यंत्र की चर्चा की, जिसने पहली बार साबित किया कि पौधों में भी जीवन होता है।
विज्ञान और गणित का दैनिक जीवन में महत्व
सकारात्मक उपयोग : डॉ. हिमांशु चौरसिया ने बताया कि विज्ञान दैनिक जीवन में रच-बस गया है, लेकिन इसके बाय-प्रोडक्ट्स के नुकसान से बचने के लिए सकारात्मक उपयोग की आवश्यकता है।
संख्याओं का खेल : डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज ने कहा कि बिना संख्याओं के दैनिक जीवन की कल्पना असंभव है, संसार की रचना में गणित की भूमिका सर्वोपरि है।
प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
इस अवसर पर एक विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने पोस्टर्स के माध्यम से विज्ञान के विविध आयामों को प्रदर्शित किया। डॉ. प्रवीण कुमार कुशवाहा द्वारा आयोजित विज्ञान क्विज प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
परिणाम इस प्रकार रहे
- प्रथम – रूपेश मरकाम
- द्वितीय –रितेश धुर्वे
- तृतीय – कु. शिवानी कुमरे
संचालन प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. सतीश ठाकरे ने किया। इस दौरान महाविद्यालय परिवार से कामधेनु पटोदिया, जोसलिन कुजूर, संध्या उपाध्याय, आयुष कुमार सादराम सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।









