रितेश राठौर, केसला। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को केसला स्थित राजनारायण स्मृति भवन (संगठन कार्यालय) में सतपुड़ा महिला संगठन ने एक महिला सम्मेलन के दौरान विस्थापन का दंश, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार और ग्रामसभा के सशक्तिकरण जैसे गंभीर मुद्दों पर महिलाओं ने मुखर होकर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम का शुभारंभ एकलव्य फाउंडेशन केसला की युवा युवतियों के प्रस्तुत एक मार्मिक नाटक से हुआ। नाटक के माध्यम से विस्थापन से होने वाले मानसिक और सामाजिक दु:ख-दर्द को जीवंत रूप में दर्शाया गया, जिसे देख उपस्थित महिलाओं की आंखें नम हो गईं। इसके पश्चात महिलाओं ने उत्साहवर्धक क्रांतिकारी गीतों की प्रस्तुति देकर सम्मेलन में ऊर्जा भर दी। सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में इटारसी से पधारीं डॉ. कैरोलीन जेम्स मेहता ने कहा कि आज भी समाज में महिलाओं को समानता का अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। कानून होने के बावजूद सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की। विशिष्ट वक्ता आशीमा ने महिलाओं को अपनी कमजोर समझने वाली मानसिकता को बदलने और चांदनी ने अपनी बात रखने में झिझक खत्म करने पर जोर दिया।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहीं बिस्तोरी बाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विस्थापन नहीं होना चाहिए, क्योंकि विस्थापन का सबसे अधिक और बुरा प्रभाव महिलाओं के जीवन पर पड़ता है।
कार्यक्रम का संचालन पूनम उईके ने किया। सभा में सर्वसम्मति से नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर भी गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर शांति बाई, सारिका ठाकुर, राधा कलमें, उर्मिला, राधा, रिंकी, जगबती बाई, अर्चना, आयशा, चांदनी, गुलिया, रोशनी, अनीता खेमरे, प्रमिला कलमें, लता और शांति सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं।








