- केवल नर्सरी का विकल्प खुलने से एलकेजी, यूकेजी और कक्षा 1 के छात्र योजना से बाहर, 23 मार्च तक सुधार नहीं तो होगा प्रदर्शन
रितेश राठौर, केसला। आदिवासी विकासखंड केसला के सैकड़ों बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर पोर्टल की तकनीकी खामी और प्रशासनिक उदासीनता का ग्रहण लगता नजर आ रहा है। आलम यह है कि नि:शुल्क शिक्षा की आस लगाए बैठे गरीब परिवारों के बच्चे अब योजना से पूरी तरह वंचित होने की कगार पर हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 23 मार्च तक पोर्टल में सुधार कर सीटें नहीं बढ़ाई गईं, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
पिछले वर्ष की गलती, इस साल भी सजा
ग्रामीणों और पालकों का आरोप है कि वर्ष 2025 में आरटीई पोर्टल समय पर संचालित नहीं होने के कारण कई पात्र बच्चे आवेदन से चूक गए थे। इसकी शिकायत जिला स्तर से लेकर कलेक्टर जनसुनवाई तक की गई, लेकिन समाधान सिफर रहा। वर्तमान सत्र 2026 में पोर्टल तो खुला, लेकिन वहां केवल नर्सरी कक्षा का ही विकल्प दिख रहा है। ऐसे में जो बच्चे पिछले साल वंचित रहे और अब एलकेजी, यूकेजी या पहली कक्षा के पात्र हैं, उनके लिए पोर्टल के दरवाजे बंद हैं।
नियमों का हवाला या जिम्मेदारी से पल्ला झाडऩा?
जब इस विसंगति पर अधिकारियों से चर्चा की गई, तो उन्होंने एंट्री लेवल कक्षा का तकनीकी हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। लेकिन सवाल यह उठता है कि प्रशासन की पिछली साल की लापरवाही का खामियाजा अबोध बच्चे क्यों भुगतें?
समय कम, चुनौतियां ज्यादा
गौरतलब है कि आरटीई आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च है। बीच में 19 से 22 मार्च तक लगातार शासकीय अवकाश होने के कारण सुधार के लिए नाममात्र का समय बचा है। यदि 23 मार्च तक तकनीकी सुधार नहीं होता, तो क्षेत्र के दर्जनों पात्र बच्चे हमेशा के लिए इस योजना से बाहर हो जाएंगे।
मुख्य मांगें
- आरटीई पोर्टल पर नर्सरी के साथ एलकेजी, यूकेजी और कक्षा 1 के विकल्प भी तुरंत शुरू किए जाएं।
- क्षेत्र में बच्चों की अधिक संख्या को देखते हुए निजी स्कूलों में आरटीई आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।
- पिछले वर्ष वंचित रहे बच्चों को विशेष केस मानकर इस सत्र में प्राथमिकता दी जाए।
जनप्रतिनिधि का कड़ा रुख
केसला मुख्यालय में सीमित निजी विद्यालय हैं। यदि पोर्टल पर सभी कक्षाओं के विकल्प नहीं खुलेंगे, तो 3 से 7 वर्ष के बच्चों का भविष्य क्या होगा? यह सीधे तौर पर आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। प्रशासन को तत्काल सीटों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
— विजय कावरे, जनपद सदस्य








