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खेतों में पककर कटने को तैयार खड़ी है फसल

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प्रशासन से मिलेगी शर्तों के साथ अनुमति
इटारसी। किसान के चार माह की मेहनत ने गेहूं की फसल पककर खेतों में तैयार खड़ी है। गर्मी बढऩे के साथ ही किसानों की चिंता भी बढ़ रही है। खेत में आगजनी का स्याह इतिहास किसानों को डरा रहा है। ऐसे में किसान को खेत काटना है और दुनियाभर में खौफ पैदा करने वाले कोरोना वायरस के कारण सरकारी स्तर पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगे हैं। प्रशासन ने अब हार्वेस्टर संचालकों, भूसा मशीन संचालकों को एसडीएम से अनुमति देने का आदेश भी जारी किया है। यदि ये मशीनें खराब होती हैं तो सुधरेंगी कहां, इनके स्पेयर पाट्र्स कहां मिलेंगे, अभी इसके लिए कोई नीति तय नहीं की गई है। ऐसे में किसान की चिंता कम होने की जगह बढ़ ही रही है।
खेतों में कटाई प्रारंभ हो गयी है। चार माह की मेहनत और हजारों रुपए खर्च करके किसान के खेत अब उत्पादन देने की स्थिति में है। ऐसे में जिला प्रशासन को जल्द ही कोई ऐसे आदेश निकालने चाहिए ताकि फसल कटाई प्रारंभ हो सके। कुछ सावधानियों के साथ ही किसानों को अपनी फसल कटाई के लिए आगे कदम बढ़ाने चाहिए। इसके लिए प्रदेश के बाहर से आने वाले हार्वेस्टर संचालकों की चिकित्सकीय जांच बहुत ही ज्यादा जरूरी है। कुछ क्षेत्रों में तो कटाई प्रारंभ हो चुकी है, क्योंकि फसल पककर जब तैयार होती है तो यह बारूद से भी अधिक ज्वलनशील होती है। ऐसे में जरा सी देरी या चूक, किसान को बर्बाद करने के लिए काफी है। पकी फसल का रखरखाव ही किसान के लिए परेशानी भरा होता है। अत: प्रशासन को जल्द ही कार्ययोजना बनाना चाहिए।

क्या करना चाहिए प्रशासन को
आगामी एक सप्ताह के भीतर खेतों में फसल कटाई का काम बहुत तेजी से होने वाला है। क्योंकि किसान अपनी मेहनत को यूं ही बेकार नहीं जाने देगा। यदि प्रशासन कोई निर्णय लेता है, तो भी और नहीं लेता है तो भी किसान फसल कटाई प्रारंभ करा ही देगा। अत: बेहतर है कि किसान को नुकसान से बचाने के लिए प्रशासन को जल्द ही कार्ययोजना बनाकर घोषित करनी होगी। जहां तक हार्वेस्टर या भूसा मशीन संचालकों की मेडिकल जांच की बात है तो इसे जल्द से जल्द प्रारंभ कराना चाहिए। खेतों में भी किसानों को सेनेटाइजर की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। प्रशासन उचित मूल्य पर किसान को यह उपलब्ध कराये। ग्रामीण क्षेत्रों में जीवाणुनाशक दवा का छिड़काव भी यदि विकल्प हो सकता है, तो किया जाना चाहिए।

पहले जारी किया फिर रोक लिया
दरअसल, जिला प्रशासन ने पहले हार्वेस्टर और भूसा मशीन संबंधी एक एडवायजरी जारी तो कर दी थी। लेकिन, फिर किसी कारण से इसे वापस ले लिया। उसमें यह था कि हार्वेस्टर और भूसा मशीन सहित कृषि उपकरणों की सुधारक और स्पेयर पाट्र्स की दुकानों को भी सुबह 6 से 9 बजे तक खोलने की अनुमति देना था। एडिशनल कलेक्टर के हस्ताक्षर से यह जारी भी हो गयी थी। लेकिन, फिर इसे वापस लेकर नया आदेश जारी किया गया है कि किसी भी भूसा मशीन संचालक और हार्वेस्टर संचालकों को फसल कटाई के लिए जाना है तो उनको पहले उस क्षेत्र के एसडीएम से बाकायदा अनुमति की आवश्यकता होगी। बिना अनुमति वे खेतों में फसल कटाई नहीं कर सकेंगे। अब पहले अनुमति लेंगे, फिर कटाई की जा सकेगी।

अल्टरनेट डे में मिल सकती अनुमति
अपर कलेक्टर जीपी माली के आदेश जारी हो चुके हैं कि गेहूं फसल कटाई को ध्यान में रखते हुए हार्वेस्टर, भूसा मशीन एवं ट्रैक्टर आदि कृषि यंत्र की रिपेयरिंग एवं ऑटो पाट्र्स की दुकानों की सत्यापित सूची संबंधित एसडीओ कृषि एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से प्राप्त कर आवश्यकतानुसार संबंधित दुकानों को खोलने की अनुमति एसडीओ राजस्व कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम हेतु भारत सरकार एवं मप्र शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों में उल्लेखित शर्तों के अध्याधीन रहते हुए ही प्रदान करेंगे। इसका पालन अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। दुकान संचालकों को यह भी निर्देश रहेंगे कि वह दुकान पर 2-3 से ज्यादा लोग इक_ा न होने दे, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क और सेनेटाइजर उपयोग भी सुनिश्चित कराये।

किसान को अनुमति मिलना चाहिए
इस समय संपूर्ण देश लॉक डाउन है। ऐसे में खेत में जब कटाई प्रारंभ हो रही है तो निश्चित है, उपकरण खराब भी होंगे और डीजल की आवश्यकता भी पड़ेगी। ऐसे में किसान को खेत से शहर और शहर से खेत भी जाना होगा। लेकिन, आज बुधवार को ही एक किसान को अपने खेत में फसल कटाई तैयारी के लिए जाना था तो पुलिस ने उसे सख्ती से रोककर वापस घर भेज दिया। उसने खेत जाने की बात भी कही, लेकिन उसकी बात नहीं मानी गयी। ऐसे में किसान क्या करे? लॉकडाउन की स्थिति और खेत में पककर तैयार खड़ी फसल किसान को बुला रही है तो उसे जाना तो पड़ेगा। ऐसे में किसान को तो अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि वह खेत में भीड़ लगाने तो नहीं जा रहा है। एसडएम हरेन्द्रनारायण का कहना है कि अनुमति दी जाएगी।

इनका कहना है…!
कुछ क्षेत्रों में गेंहू कटाई प्रारंभ हो चुकी है और यह आवश्यक है कि इसका मेंटेनेंस कैसे किया जाए, प्रशासन को अब यह कार्ययोजना बनानी चाहिए। हफ्ते-दस दिन में बहुत तेजी से कटाई प्रारंभ होगी। हार्वेस्टर स्टाफ की मेडिकल जांच, सैनिटाइजर का प्रॉपर प्रयोग और उसकी उचित मूल्य पर उपलब्धता, ग्रामीण क्षेत्रों में एग्रीकल्चर दवाई ही जो जीवाणुनाशक हो का छिड़काव कुछ कदम हो सकते हैं।
यज्ञदत्त गौर, किसान

हार्वेस्टर और भूसा मशीन के 4 सौ रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। खेत में जा रहे किसान को और हार्वेस्टर या भूसा मशीन संचालक को नहीं रोका जाएगा। संचालक कृषि अभियांत्रिकी ने भी आदेश कर दिये हैं कि प्रदेश में कम्बाइन हार्वेस्टर, स्ट्रा रीपर तथा थ्रेसर आदि मशीनों के परिवहन तथा संचालन को प्रतिबंध से शिथिल रखा जाए। प्रत्येक मशीन पर संचालन के लिए 2-5 व्यक्ति होते हैं, उन्हें भी समुचित सावधानी रखने के निर्देश के साथ अनुमति प्रदान की जाए।
जितेन्द्र सिंह, उपसंचालक कृषि

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