इटारसी। वर्ष 2017 पूरे भारत में हिन्दी के महान साहित्यकार गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी संदर्भ में कन्या महाविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा एक दिनी संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आनंद सिंह, निदेशक कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन थे तथा अध्यक्षता डा. कश्मीर उप्पल, मुख्य वक्ता ओमभारती कवि, कथाकार एवं समीक्षक भोपाल मुख्य रूप से आमंत्रित थे।
अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. कुमकुम जैन, डॉ. व्हीके राणा, डॉ. श्रीराम निवारिया, डॉ. आरएस मेहरा, आनंद पारोचे, हरप्रीत रंधावा, छात्रासंघ अध्यक्ष अपूर्वा अग्रवाल, अतिथि विद्वान कामधेनु पटोदिया, सुषमा चौरसिया, प्रियंका भट्ट ने किया।
मुक्तिबोध के एक गीत को प्रियंका मेढ़े, कविता चौहान तथा ऐश्वर्या बडग़े ने प्रस्तुुत किया। अपूर्वा अग्रवाल ने मुक्तिबोध की एक कविता का वाचन किया। गीतकार रामकिशोर नाविक ने मुक्तिबोध की कविता मुझे भ्रम होता हैं, विनोद कुशवाहा ने हे कविते, हे मर्मधे, का वाचन, ग्रंथपाल आनंद कुमार पारोचे ने कवि की कविता लोग-बाग प्रस्तुत की। हिन्दी विभागध्यकक्ष डॉ. श्रीराम निवारिया ने बताया कि मुक्ति बोध की कविताओं में ऊपरी तौर पर समानता दिखाई देती है लेकिन हर कविता का विषय अलग है। पूर्व प्राचार्य डॉ विद्या जैन ने तारसप्तक की चर्चा की। मुख्या वक्ता ओम भारती ने बताया कि मुक्तिबोध इटारसी आने पर उनके ताऊ विनय भारती और पिता महेश भारती से मिलने आते थे। मुख्य अतिथि आनंद सिन्हा ने मुक्ति बोध के साहित्य को जनता को दिशा देने वाला बताया। कार्यक्रम में मीनाक्षी कोरी, महेन्द्रिका मालवीय, चारू तिवारी, डॉ. संजय आर्य, उमाशंकर धारकर, सरिता मेहरा एवं छात्राएं उपस्थित थीं।
मुक्तिबोध जन्म शताब्दी वर्ष में संगोष्ठी आयोजित
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