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बच्चों ने पूछा कैसे बनते हैं आईएएस अफसर

बच्चों ने पूछा कैसे बनते हैं आईएएस अफसर

संवाद कार्यक्रम का आयोजन
इटारसी। सर, आईएएस अफसर कैसे बनते हैं? कितना पढऩा पड़ता है और क्या करना पड़ता है। ये सवाल थे, शासकीय उत्कृष्ठ विद्यालय केसला में पढऩे वाले बच्चों के, जो उन्होंने जनपद सीईओ और सहायक कलेक्टर स्वप्निल बानखेड़े से पूछे। जवाब भी काफी विस्तार से मिला। श्री बानखेड़े ने बच्चों को बहुत अच्छे से आईएएस की तैयारी और पढ़ाई के विषय में बताया। अवसर था, संवाद कार्यक्रम का। आज सीईओ उत्कृष्ठ विद्यालय में बच्चों से संवाद करने पहुंचे थे।
सीईओ श्री बानखेड़े ने सबसे पहले उत्कृष्ठ विद्यालय परिसर में स्थित शासकीय हॉस्टल चूरना का निरीक्षण किया और यहां निकास की समस्या मिलने पर संबंधित अधिकारी को बुलाकर समस्या का त्वरित निदान के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल में आकर यहां लैब देखी। उन्होंने करीब डेढ़ घंटे स्कूल में बिताए। संवाद कार्यक्रम में श्री बानखेड़े ने कहा कि यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो सबसे पहले इस बात को भूलना पड़ेगा कि, लोग क्या कहेंगे? यह एक ऐसा शब्द है जो सफलता में बाधक है। काम ऐसा करें जो भविष्य बना सके। उन्होंने बच्चों को शिक्षा का महत्व बताते हुए पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। बच्चों के प्रश्र करने पर उन्होंने आईएएस की तैयारी के विषय में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि 12 से 14 घंटे की पढ़ाई जरूरी है। पढऩा, खाना और सोना। ये तीन काम में से पढऩा 14 घंटे और शेष 10 घंटे में खाना और सोना।
बच्चों ने सवाल किया कि साइंस का विद्यार्थी आईएएस बन सकता है या नहीं? जवाब में श्री बानखेड़े ने कहा, इसके लिए स्नातक होना जरूरी है, विषय कोई भी हो सकता है। उन्होंने प्री और मेन परीक्षा की तैयारी बतायी और स्वयं कैसे तैयारी की, यह भी बताया। साक्षात्कार कैसे होता है, यह भी बच्चों को बताया। वे स्वयं खुशहाल भारत के लिए काम करने के इच्छुक है, यह भी बच्चों को बताया। इस अवसर पर शासकीय उत्कृष्ठ विद्यालय के प्राचार्य, जनपद सदस्य मनोज गुलबाके, शिक्षक राजेश पाराशर सहि अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और बच्चे मौजूद थे।

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