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देशज का उद्घाटन, हजारों ने किये देश की लोक संस्कृति के दर्शन किये

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इटारसी। देशज, यानी देश की सांस्कृतिक विरासत की कलात्मक प्रस्तुति। पहला दिन ही इतना धमाकेदार रहा कि हरेक प्रस्तुति पर लोगों की खूब तालियां मिलीं। छह प्रस्तुतियां रहीं। पहली प्रस्तुति देश के समृद्ध प्रदेश पंजाब की रही जिसमें अमृतसर की बाबा सिस्टर्स ग्लोरी बाबा और लाची बाबा ने पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को बिखेरा। हरेक गीत इतना उत्साह से परिपूर्ण रहा कि लोग बैठे-बैठे भी झूमते रहे। पंजाब में विभिन्न अवसरों पर गाये जाने वाले गीतों से उपस्थित हजारों लोगों से दोनों बहनों ने रूबरू कराया।
भारत की पारंपरिक, लोक एवं जनजातीय अभिव्यक्तियों का उत्सव देशज का शनिवार को शुभारंभ गांधी स्टेडियम में सांसद उदय प्रताप सिंह, विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा और नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती सुधा अग्रवाल ने किया। पंजाब के बाद अपनी ही माटी की महक महसूस हुई जब आदिवासी धुलिया जनजातीय सांस्कृतिक लोक नृत्य लेकर डिंडोरी मप्र का दल मंच पर आया। गुदुम बाजा की इतनी जोरदार प्रस्तुति हुई कि स्वयं कांग्रेस नेता पाली भाटिया पुष्प वर्षा करने से स्वयं को नहीं रोक सके। उनका साथ दिया नगर भाजपा मंडल अध्यक्ष नीरज जैन ने। गुदुम बाजा ढुलिया जनजाती का नृत्य है जो जन्म, मृत्यु, विवाह एवं पूजा अनुष्ठान के वक्त प्रयोग किया जाता है। यह इनका पारंपरिक वाद्य है। प्रत्येक नर्तक की कमर के सामने गुदुम बाजा बंधा रहता है जिसे नर्तक नृत्य शैली के अनुसार डगर चली, माता पार, दौड़, घुमक, तालबंद, कहरबा और लहकी की धुनों को बजाकर नृत्य करते हैं। हर प्रस्तुति पर हजारों दर्शकों की तालियों से गांधी मैदान गूंजता रहा। लमबाड़ी नृत्य चंदना जनपद नृत्य एकेडमी हैद्राबाद ने प्रस्तुत किया। यह तेलंगाना और आंध्रप्रदेश का प्रसिद्ध आदिवासी नृत्य है जो बंजारा या सेंगाली जनजाति समुदाय द्वारा किया गया। इसमें महिला नर्तकियां, पुरुष डप्पू और नगाड़ा वादकों के साथ मिलकर अपने भगवान को अच्छी फसल की उत्पत्ति के लिए धन्यवाद स्वरूप नृत्य अर्पित करते हैं। चौथी प्रस्तुति झिझिया नृत्य, बिहार की रही जिसमें विक्रांत कुमार एवं दल मधुबनी द्वारा यह नृत्य पेश किया। यह बिहार का लोकनृत्य है जो दुर्गा पूजा के अवसर पर किया जाता है। महिलाओं द्वारा किया जाने वाले इस नृत्य में ग्रामीण महिलाएं अपनी सखी-सहेलियों के साथ एक घेरा बनाकर नृत्य करती हैं। घेरे के बीच एक मुख्य नर्तकी सिर पर घड़ा लेकर खड़ी रहती है जिस पर एक दीपक जलता है। अगली प्रस्तुति सिलापथर पूर्व ज्योति संघ घेमाजी असम द्वारा बिहू नृत्य रही। बीहु युवक-युवतियों का सामूहिक नृत्य है जिसमें तेजी से कदम उठाना, हाथों का उछालना और चुटकी बजाकर कमर मटकाना इस नृत्य की विशेषता है। इस पर भी खूब तालियां बजीं। इसके बाद पुन: दर्शक कलासागर में गोता लगाते हुए अपने प्रदेश में लौटे। बुंदेलखंड में तीज-त्योहारों, जन्मदिन, विवाह आदि मांगलिक अवसरों पर शीतला माता की आराधना में किया जाने वाल बधाई नृत्य लेकर आए लोक दर्पण पारंपरिक एवं समकालीन कलारूपों का संस्थान सागर के कलाकार। संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रस्तुत इन कार्यक्रमों में हजारों लोगों ने अपनी उपस्थित देकर देश की विभिन्न लोक संस्कृति के दर्शन किये। रविवार का दिन और अधिक खास रहेगा। दर्शकों के आकर्षक का केन्द्र रहेगा गुजरात का सिद्धिधमाल। वाकई इसके माध्यम से धमाल होने की उम्मीद है। रविवार को छत्तीसगढ़ का लोकसंगीत होगा तो मप्र का सेरा नृत्य, मिजोरम का चेराव एवं चेलम, उत्तराखंड का तांदी नृत्य और कर्नाटक का पूजा कुनिथा भी देखने को मिलेगा। नगर के लोगों को देश की इस सांस्कृतिक विरासत के दर्शन करने के लिए आयोजकों ने भरपूर बैठक व्यवस्था की है और इस कार्यक्रम में हरेक को जाना चाहिए। हरेक प्रस्तुति इतनी शानदार कि यह देखने से अधिक महसूस की जाने वाली कला है।

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उद्घाटन समारोह
अतिथियों ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सांसद उदयप्रताप सिंह ने कहा कि देशज देश के उन लोक कलाकारों को प्लेटफार्म देने का एक माध्यम है, जो प्रतिभाशाली हैं, लेकिन वे अवसर नहीं मिलने पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पाते। इन कलाकारों से कई अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुति देखने को मिलेगी। सांसद ने कहा कि इटारसी ऐसा शहर है जहां पूरा हिन्दुस्तान रहता है। यहां देश के हरेक प्रांत के लोग मिल जाएंगे। उन्होंने राजस्थान के बहुरूपिया कला दल की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह अवसर है, जिसका सभी को आनंद उठाना ही चाहिए।
विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा ने कहा कि किसी भी देश की पहचान उसकी सीमा, लीडरशिप से नहीं बल्कि उसकी संस्कृति से होती है। देश के माध्यम से इटारसी और आसपास के लोगों को देश की सांस्कृतिक विरासत देखने को मिलेगी। उन्होंने दूसरी बार देशज जैसा राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम इटारसी शहर में कराने पर राष्ट्रीय संगीत एवं नाटक अकादमी नयी दिल्ली और संस्कृति मंत्रालय के साथ ही सांसद उदयप्रताप सिंह का भी आभार व्यक्त किया। स्वागत भाषण में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती सुधा अग्रवाल ने देशभर से आये कलाकारों, दर्शकों और संगीत नाटक अकादमी को धन्यवाद दिया और शहर में उनका स्वागत किया। संचालन सुनील बाजपेयी ने और आभार प्रदर्शन जसपाल सिंघ भाटिया ने किया। देशज के विषय में जानकारी संगीत नाटक अकादमी के उपसचिव राजू दास ने दी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का बहुत ही उम्दा संचालन भोपाल आकाशवाणी की उद्घोषिका श्रीमती सुनीता सिंह ने किया और मंच पर प्रकाश का बेहतरीन संयोजन राष्ट्रपति अवार्डी कमल जैन ने किया।

बहुरूपियों के साथ सेल्फी की होड़
राजस्थान के दौसा का अकरम खान के दल ने मैदान में लोगों के बीच खासा आकर्षण बनाकर रखा था। बच्चों और युवाओं में इन बहुरूपियों के साथ सेल्फी लेने की होड़ थी। भगवान शंकर का रूप, रावण और श्रीराम का रूप, जोकर के रूप में अकरम खान, फिरोजखान, फरीद खान, नौशाद खान, शमशाद और सलीम खान की बहुरूपिया कला के लोग दीवाने हो गये।

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