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आठ वर्ष पूर्व एक महत्वपूर्ण योजना चली गई हाथ से

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अब भी है, सीवर लाइन योजना का इंतजार
इटारसी।शहर को अब भी सीवर लाइन योजना का इंतजार है। कई तकनीकि पहलुओं के कारण शहर के हाथ से करीब आठ वर्ष पूर्व यह योजना निकल गयी। इस पर नये सिरे से काम करने की जरूरत है। शहर को मिली सीवर लाइन योजना कई कारणों से सन् 2011 में निरस्त हो गयी और शासन से आया पैसा भी वापस चला गया था। यदि योजना पर फिर से काम हो और स्वीकृति के बाद पूर्ण हो जाए तो शहर को न सिर्फ गंदगी से मुक्ति मिलेगी बल्कि इसके बेहतर परिणाम शहर को मिलने लगेंगे।
शहर में यूआईडी एसएसएमटी योजना के अंतर्गत सीवर लाइन के लिए 24 सितंबर 2007 में स्वीकृति मिली थी। योजना के लिए चार बार टेंडर कॉल भी हुए और चौथी बार में ठाणे महाराष्ट्र की एसएमसी इंफ्रा को इसका काम भी मिल गया था। लेकिन, दर स्वीकृति में देरी होने से योजना की लागत बढऩे की आशंका और निविदा की वैधता खत्म होने के कारण कंपनी ने काम करने से मना कर दिया। अन्य कदम भी उठाये गये लेकिन रिवाइस डीपीआर नहीं बन पाने से इसके लिए आया पैसा सरकार ने वापस ले लिया।

चार स्थानों पर ट्रीटमेंट प्लांट
सीवर लाइन योजना के अंतर्गत शहर में चार स्थानों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किये जाने थे। यहां ट्रीटमेंट के बाद पानी को नदी में छोड़ा जाता। इसमें चार जगह जमीन के लिए एसडीओ राजस्व को पत्र भी लिखा जा चुका था। इस बीच योजना का काम देख रहे सब इंजीनियर मुकेश जैन का तबादला हो चुका था। इसके बाद जिस सब इंजीनियर श्रोती को यह काम दिया उन्होंने योजना में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। यही से योजना पर काम आगे नहीं बढ़ा।

जल आवर्धन में देरी भी कारण
दरअसल, सीवर लाइन में मल को बहाने के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती और यह पानी जल आवर्धन योजना के अंतर्गत ही प्राप्त हो सकता था। चार बार टेंडर के बाद जब योजना में ठेका कंपनी ने रुचि नहीं ली तो राज्य तकनीकि समिति ने रिवाइस डीपीआर के लिए लिखा। इस बीच सब इंजीनियर मुकेश जैन का तबादला हो गया। नये सब इंजीनियर दिनेश श्रोती ने रुचि नहीं ली। योजना में देरी के कारण 1 करोड़ 69 लाख की राशि लैप्स हो गयी।

समय पर काम हो सकता था
योजना में सही समय पर काम हो सकता था। दरअसल चौथी निविदा के बाद समय पर 2011-12 में वित्तीय स्वीकृति मिल जाती तो योजना पर काम तो प्रारंभ हो सकता था। हालांकि चौथी बार निविदा के बाद इसे राज्य वित्तीय समिति के पास भेजा था। लेकिन, वहां से स्वीकृति में देरी से ठेका कंपनी एसएमसी इंफ्रा ने निविदा की वैधता खत्म होने की आड़ में काम करने से मना कर दिया। इस दौरान योजना देरी के कारण मटेरियल के दाम भी बढ़ चुके थे।

रिवाइज डीपीआर में भी देरी
दरअसल, राज्य तकनीकि समिति ने डीपीआर रिवाइज करने के लिए नगर पालिका को कहा था। इसके लिए तत्कालीन सब इंजीनियर मुकेश जैन ने कंसल्टेंट को भी लिख दिया था। लेकिन, नये सब इंजीनियर ने इस ओर रुचि लेकर काम नहीं किया। अब यह योजना लगभग भूल जाने वाली स्थिति में पहुंच गयी है। इस पर दोबारा काम भी होगा तो उसे नये सिरे से करना होगा। ऐसी अन्य कोई योजना के लिए जनप्रतिनिधियों, नयी परिषद और नेताओं को प्रयास करने होंगे।

यहां बनने थे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
– घाटली रपटे के पास
– मेहरागांव नदी के पास
– बूढ़ी माता के पीछे नदी पर
– न्यास कालोनी टंचिंग ग्राउंड

इनका कहना है…!
यह काफी पुरानी बात हो गयी है। अब तो इस योजना पर काम मुश्किल है। अलबत्ता यदि नगर पालिका परिषद, जनप्रतिनिधि या प्रभावशाली नेता चाहें तो वे ऐसी ही योजना को शहर के लिए स्वीकृत करा सकते हैं। फिर भी मैं इस पुरानी योजना के विषय में जानकारी लेता हूं।
हरिओम वर्मा, सीएमओ

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