-इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार (Electronics market) में ऑनलाइन से पड़ा फर्क
– रेडिमेड कपड़ा (Readymade clothes) बाजार में संतोषजक रही ग्राहकी
– दो तिथियां होने से पर्व अनुसार नहीं रही रोनक
इटारसी। इस वर्ष धन त्रयोदशी का पर्व दो दिन मनाया जा रहा है। आज पहले दिन बाजार में उठाव आने से व्यापारियों को उम्मीद जागी है। कोरोना काल में बाजार की स्थिति बिगडऩे के बाद सबसे अधिक आशा दीपावली से ही लगायी जा रही थी। शेष त्योहार लॉकडाउन (Lockdown) और कोरोना (Corona) की गाइड लाइन का सख्ती से पालन करने में निकल गये। हालांकि दीपावली में भी कोरोना गाइड लाइन का पालन करना है, लेकिन कोरोना संक्रमण में आयी कमी ने दीपावली मनाने के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ाया है। बावजूद इसके कुछ सामान की खरीदारी ने उम्मीद जगायी है तो कुछ को फिलहाल निराशा ही हाथ लग रही है।

कोरोना महामारी (Corona Mahamari) में लगभग निश्तेज हो चुके बाजार को दीवाली के पांच दिवसीय पर्व के पहले दिन धनतेरस (Dhanteras) पर अच्छी ग्राहकी होने उम्मीद है, यह पर्व दो तिथियों में पड़ रहा है। पहला दिन संतोषजनक रहा और अब अगले दिन अच्छा उठाव होने की उम्मीद जागी है। बाजार में मंदी को को देखते हुए कई दुकानदार ग्राहकों को लुभाने ऑफर दे रहे हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर (Automobile Sector) और इलेक्ट्रानिक (Electronic) के अलावा सराफा, कपड़ा, किराना में अच्छे व्यापार की उम्मीद है तो वहीं दीपावली की पूजा में लगने वाली सामग्री की लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
सराफा में आशाजनक ग्राहकी

धनतेरस पर कुछ ग्राहकी बढ़ी है, कल तक अच्छे उठाव की उम्मीद है। खासकर हर बार की तरफ सराफा बाजार, मोबाइल सहित इलेक्ट्रॉनिक बाजार में तेजी से उछाल की उम्मीद की जा रही हैं। सराफा कारोबारी संजय गोठी ने बताया कि कुछ वर्षों से दीपावली का बाजार दो-तीन दिन में सिमट गया है। सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष यज्ञदत्त गौर का कहना है कि हमें आशा है कि कल से तेजी आएगी। दरअसल दो तिथियां होने से भी कुछ फर्क पड़ा है। आज की ग्राहकी आशाजनक है, और कल इसमें और उठाव आने की उम्मीद की जा रही है। इस बार डिजीटल पेमेंट करने वालों की अच्छी खासी संख्या देखने को मिली है।
आटोमोबाइल सेक्टर को है उम्मीद

दीपावली पर जहां आटोमोबाइल सेक्टर में धनतेरस के दिन से तेजी देखने को मिलती थी, इस वर्ष इसका बहुत अधिक अभाव है। मोटर सायकिल विक्रेता मो. अतहर खान बताते हंै कि पिछले वर्षों में धनतेरस से यदि तुलना की जाए तो इस वर्ष आज की स्थिति में 50 फीसद भी गाडिय़ों की बिक्री नहीं हुई है। पिछले वर्षों में धनतेरस के दिन से मोटरसायकिल की बिक्री बहुत अधिक होने लगती थी। इस वर्ष पचास फीसद ग्राहक भी बाहर नहीं निकले। उन्होंने भी माना कि हो सकता है कि दो दिन की धनतेरस होने से ग्राहकी बंट गयी हो, अत: हम उम्मीद कर रहे हैं कि शुक्रवार को संभवत: आटोमोबाइल सेक्टर में उठाव आ सके।
फर्नीचर/इलेक्ट्रॉनिक्स

कोरोनाकाल में आमजन की स्थिति बिगडऩे से फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर खासा असर पड़ा है। उस पर आजकल ऑन लाइन मार्केटिंग के कारण सबसे अधिक स्थिति इन्हीं दो कारोबार की खराब हुई है। फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के विक्रेता हरीश अग्रवाल बताते हैं कि इस वर्ष आज की स्थिति करीब चालीस फीसदी ग्राहकी कम हुई है। इसके पीछे केवल कोरोना ही कारण नहीं, बल्कि ऑनलाइन मार्केटिंग भी है। दरअसल, कोरोना की वजह से लोगों की आर्थिक स्थिति बिगड़ी है, रोजगार प्रभावित हुए हैं तो लोगों की क्रय क्षमता पर भी असर पड़ा है। मिडिल क्लास और निम्र मध्यम वर्ग ही इनके खरीदार होते हैं।
कपड़ा बाजार खुशहाल रहा

रेडिमेड कपड़ों के विक्रेता कन्हैया गुरयानी कहते हैं कि कपड़ा बाजार बहुत अधिक प्रभावित नहीं रहा है। त्योहार में कोई विलासिता की वस्तुएं खरीदे या न खरीदे, कपड़ा के कारोबार पर बहुत अधिक नहीं पड़ता है। दीपावली जैसे पर्व पर लोग नये कपड़े खरीदने में पीछे नहीं रहते हैं। नये कपड़े और मां लक्ष्मी के पूजन के लिए पूजन सामग्री, प्रसाद के लिए मिठाई जैसी चीजें अनिवार्य समझते हैं। श्री गुरयानी बताते हैं कि कपड़ा कारोबार धनतेरस या दीपावली के दिन का इंतजार नहीं करता। इस कारोबार के ग्राहक एक सप्ताह पूर्व से ही खरीदी प्रारंभ करते हैं और इस वर्ष भी हर रोज थोड़ा कारोबार चल ही रहा है जो संतोषजनक है।
पटाखा से कम होता रुझान

पटाखा व्यापारी मायूस हैं। पटाखा विक्रेता संघ के अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि स्थिति संतोषजनक भी नहीं कही जा सकती है। जो भी ग्राहक आ रहा है, उसे पटाखे महंगे लग रहे हैं। पटाखा बाजार की स्थिति बहुत बेकार है। जो लोग यह कह रहे हैं कि स्थिति संतोषजनक है, वे वास्तविकता से भागने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पटाखा बाजार केवल तीन दिन का होता है। धनतेरस से ही पटाखों की बिक्री प्रारंभ हो जाती है। हमें बाजार में दुकान लगाने के लिए कई प्रकार के शुल्क जमा करना होता है, इस वर्ष कुछ राहत अवश्य है, लेकिन फीस तो देना ही पड़ा, अन्य खर्च अलग। ऐसे में ग्राहकी नहीं होना चिंता का विषय है।
मोबाइल दुकानों पर अच्छी ग्राहकी

मोबाइल आज सबकी जरूरत बन गयी है। एक मजदूर से लेकर बड़े कारोबारी हो या फिर किसी भी प्रकार के काम में संलग्न हो, बिना मोबाइल आज की दुनिया की कल्पना करना ही मुश्किल है। यही कारण है कि बाजार में कितनी भी मंदी आ जाए, मोबाइल का कारोबार बेअस चलता रहता है। दीपावली के त्योहार पर भी यह कारोबार मंदी से बेअसर रहा और लोगों ने अपनी क्षमताओं के अनुसार मोबाइल की खरीदी की। मोबाइल विक्रेता जैकी मिहानी बताते हैं कि धनतेरस के लिहाज से बाजार बहुत अच्छा रहा है। कितनी ही मंदी आ जाए, मोबाइल रखना लोगों की जरूरत बन गयी है, अत: मोबाइल बाजार में असर नहीं होता।
धनतेरह के कारोबार पर नजर
सराफा बाजार – लगभग 10 करोड़
कपड़ा बाजार – करीब 50 लाख रु.
इलेक्ट्रानिक/फर्नीचर – करीब एक करोड़
मोबाइल – लगभग 50 लाख रुपए
आटोमोबाइल- करीब एक करोड़ रुपए








