इटारसी। नगर के पशुपतिनाथ मंदिर में जारी शिव पुराण कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथावाचिका देवी रत्नमणि द्विवेदी ने भगवान शिव के सबसे प्रिय बिल्व पत्र (बेलपत्र) की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।
बेलपत्र केवल पत्ता नहीं, समर्पण का प्रतीक
देवी रत्नमणि ने बताया कि शिव पूजा में बेलपत्र का महत्व अनिवार्य है। इसके पीछे छिपे गूढ़ रहस्यों को उन्होंने कुछ प्रमुख बिंदुओं में साझा किया। समुद्र मंथन के समय जब महादेव ने विषपान किया, तो उनके शरीर के ताप को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें बेलपत्र अर्पित किए थे। बेलपत्र अपने विषनाशक गुणों से शिव को शीतलता प्रदान करता है। बेलपत्र के तीन दल साक्षात् ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप हैं। यह शिव के तीन नेत्रों सूर्य, चंद्र, अग्नि और उनके अस्त्र त्रिशूल का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। देवी भागवत के अनुसार, बेल का वृक्ष माता पार्वती के पसीने की बूंदों से उत्पन्न हुआ है, अत: बेलपत्र चढ़ाना शिव-शक्ति की संयुक्त पूजा के समान है। तीन पत्तियां मनुष्य के तीन गुणों सत्व, रजस और तमस के समर्पण का प्रतीक हैं।
भक्तिमय वातावरण, भजनों की प्रस्तुति
कथा के दौरान जब देवी जी ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी, तो पूरा पंडाल हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूमते नजर आए। कथा में नगर के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने सहभागिता की।










