- सेन परिवार ने अनूठी परंपरा से अर्पित की स्व. जगदीश प्रसाद को श्रद्धांजलि
इटारसी। सांसारिक विदाई के बाद अपनों को याद करने का सबसे पवित्र मार्ग भक्ति और सेवा है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए शहर के सूरजगंज स्थित सरला मंगल भवन में रविवार की शाम एक आध्यात्मिक उत्सव के रूप में तब्दील हो गई। अवसर था स्व. जगदीश प्रसाद सेन की पुण्यतिथि का, जिसे उनके परिवार ने मां जीण भवानी के मंगल पाठ और भजनों के माध्यम से एक पावन स्मृति दिवस में बदल दिया।
राजस्थान के सूरतगढ़ से आईं सुप्रसिद्ध भजन गायिका मिताली अरोरा ने जब मां जीण भवानी की महिमा का बखान शुरू किया, तो पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। उनकी सुमधुर आवाज और पारंपरिक भजनों ने श्रोताओं को राजस्थान की उस पावन धरा का अनुभव कराया, जहाँ मां जीण का वास है। मंगल पाठ के दौरान भक्तों की तन्मयता देखते ही बन रही थी।
क्यों खास है जीण माता का मंगल पाठ?
धार्मिक मान्यताओं में मां जीण भवानी को शक्ति और ममता का स्वरूप माना जाता है। उनके मंगल पाठ का आयोजन घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना है। सेन परिवार द्वारा अपनी पूर्वज की पुण्यतिथि पर इस आयोजन का चयन यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी आज भी संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों को सर्वोपरि मानती है। सेन परिवार ने भजन-कीर्तन और भंडारे के माध्यम से एक सामूहिक पुण्य कार्य किया।
मां जीण भवानी का भव्य दरबार में फूलों और ज्योत से सजी मां की चौकी ने सबका मन मोह लिया। कार्यक्रम के समापन पर महाआरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी जनता ने भाग लिया। आरती के पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक भोजन प्रसादी ग्रहण की। यह आयोजन मात्र एक स्मृति कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण था कि भक्ति के सुर जब श्रद्धा के साथ मिलते हैं, तो आत्मा को असीम शांति प्राप्त होती है। कार्यक्रम के अंत में सेन परिवार और आयोजकों ने इस भक्तिमय यात्रा में सहभागी बनने के लिए सभी नगरवासियों और धर्मप्रेमियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।








