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वन विभाग की कथित ‘दबंगई’, विशेष दर्जा प्राप्त केसला ब्लॉक में किसान बेदखली से परेशान

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इटारसी। नर्मदापुरम जिला मुख्यालय की इटारसी तहसील के अंतर्गत आने वाले विशेष दर्जा प्राप्त केसला विकासखंड में वन विभाग की कार्रवाई ने स्थानीय किसानों और जनजाति समुदाय के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पेसा एक्ट के प्रभावी कानून के तहत विशेष दर्जा प्राप्त इस क्षेत्र के पिपरिया कलॉ गांव में वन विभाग पर बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के किसानों को उनकी कृषि भूमि से बेदखल करने का आरोप लगा है।

पिपरिया कलॉ में कृषि भूमि को नुकसान

शिकायत के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों ने पिपरिया कलॉ ग्राम में आदिवासियों और पिछड़ा वर्ग के किसानों की कृषि भूमि पर जोर आजमाया। किसानों का आरोप है कि वन विभाग ने उनकी लगी हुई बागुड़ (बाड़) को तोड़ दिया और मशीन द्वारा उनकी कृषि भूमि को खराब कर दिया। किसानों को यह धमकी भी दी गई कि यदि उन्होंने दोबारा इस भूमि का उपयोग किया तो उन सभी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

‘दावे-आपत्ति की रसीदें थीं, फिर भी नहीं सुनी’

किसानों ने बताया कि उनके पास उस भूमि के संबंध में दावे-आपत्ति की रसीदें उपलब्ध हैं, जो उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को दिखाई भी। इसके बावजूद, अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और कार्रवाई जारी रखी। किसानों के अनुसार, कानून स्पष्ट कहता है कि अगर किसी भूमि पर दावे या आपत्तियां लंबित हैं, तो उनके निराकरण तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती, लेकिन वन विभाग ने इस नियम का उल्लंघन किया है।

पेसा एक्ट और ग्राम सभा की अनदेखी

इस कार्रवाई पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया है। समाजसेवी तारा वरकड़े ने कहा कि यह क्षेत्र पेसा एक्ट के अंतर्गत आता है, जहां ग्राम सभा को किसी भी कार्रवाई से पहले सूचना देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद प्रशासन इस तरीके से कार्रवाई कर रहा है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट और ग्राम सभा के नियमों का उल्लंघन किया है, आदिवासियों से जमीनें छीनकर पूंजीपतियों को देने की साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे। समाजसेवी कपिल खंडेलवार ने भी इस कार्रवाई को मनमाना बताते हुए कड़ा विरोध व्यक्त किया है और कहा कि यह क्षेत्र के जनजाति और दलित समाज के लोगों को लगातार प्रताडि़त करने का एक और उदाहरण है, जिसे सरकार की घोषणाओं में तो सुर्खियां मिलती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर न्याय नहीं।

ग्रामीण सेवंती बाई का कहना है कि हमारे खेत की फैंसिंग तोड़ दी, तीन पीढिय़ों से हमारा परिवार यहां बुआई कर रहा है, अब भले जेल जाएं या मर जाएं, हम यह जमीन नहीं छोड़ेंगे। किसान संतोष दामले ने कहा कि वन विभाग का अमला जिसमें रेंजर अभिषेक शर्मा भी थे, अचानक पहुंचे और जमीन बिगाड़ दी। हमें बोवनी नहीं करने की धमकी दी गई, हमारी बात भी नहीं सुनी, जबकि हम तीन पीढिय़ों से इस भूमि पर फसल ले रहे हैं। किसान अब न्याय के लिए आगे की रणनीति बनाने की तैयारी कर रहे हैं। बुजुर्ग गणेशा प्रसाद का कहना है कि हमारी जमीन पर वन विभाग ने रोक लगा दी, हमने वनाधिकार पट्टा दिखाया, लेकिन अफसर सुनने को तैयार ही नहीं थे, हमें जेल भेजने की धमकियां दी गईं, यह क्यों किया जा रहा है, हमें बताना भी उचित नहीं समझा।

इस मामले में रेंजर अभिषेक शर्मा को कॉल किया तो लगातार घंटी बजने के बावजूद उन्होंने हमेशा की तरह कॉल रिसीव नहीं किया। जबकि एसडीओ वन मानसिंह मरावी ने कहा कि मैं बाहर था, मुझे इस विषय में कोई जानकारी नहीं है, रेंजर का कॉल भी नहीं लग रहा है, उनसे संपर्क होने के बाद ही कुछ कह सकेंगे।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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