इटारसी । भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय, सुखतवा में आज विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आत्महत्या की रोकथाम करना था।
प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत के संरक्षण और राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राधा आशीष पांडे के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने छात्रों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की शुरुआत में, प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने बदलते लाइफस्टाइल और आपसी व्यवहार में कमी के कारण बढ़ रहे मानसिक तनाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे लोगों को पहचानना चाहिए जो लंबे समय से परेशान हैं, जिनका व्यवहार चिड़चिड़ा है या जो बीमार हैं। ऐसे लोगों को अकेला महसूस न होने दें और उन्हें अपनी परेशानियां साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. सतीश ठाकरे ने बताया कि व्यक्ति कई तरह से मानसिक रूप से पीड़ित हो रहा है, जिससे वे अपनी समस्याओं का समाधान नहीं ढूंढ पा रहे हैं और आत्महत्या की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि जीवन को इन सब से दूर रहकर व्यवस्थित रूप से जीना चाहिए।
मैत्री ऐप और जीवन की चुनौतियों पर चर्चा
उमंग संस्था की काउंसलर गीता राजपूत ने छात्रों को मैत्री ऐप के बारे में बताया, जो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की समस्याओं का समाधान खोजने में मदद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल 15 से 29 वर्ष के युवा लालच में आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं।राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राधा आशीष पांडे ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि “जीवन हर समस्या को हल करने का अवसर है, कठिनाइयां अस्थायी होती हैं, किंतु आत्महत्या स्थाई दुख छोड़ जाती है।” उन्होंने बताया कि भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख लोग और विश्व में 7.5 लाख लोग आत्महत्या करते हैं।
उन्होंने छात्रों से अपनी समस्याएं साझा करने और साहस के साथ समाधान ढूंढने की आदत डालने का आग्रह किया।कार्यक्रम के अंत में, प्राचार्य ने सभी छात्रों को शपथ दिलाई कि वे अपने जीवन को अनमोल समझेंगे और कभी भी आत्महत्या के बारे में नहीं सोचेंगे। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में परिवार, दोस्तों, शिक्षकों और काउंसलर से मदद लेनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रवीण कुशवाहा ने किया और आभार धीरज गुप्ता ने व्यक्त किया। ।









