इटारसी। गोदाम यदि पूंजी प्राप्ति का साधन है, तो गौधाम पुण्य प्राप्ति का मार्ग है। आज हमारी संस्कृति की रीढ़ गौवंश सड़कों पर है, जो भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। यह मार्मिक विचार सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. नीरज महाराज ने व्यक्त किए। वे खेड़ापति माता मंदिर प्रांगण में साहू परिवार रैसलपुर द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
सड़कों पर गौवंश, भविष्य पर प्रश्नचिह्न
महाराज जी ने कहा कि समय बदलने के साथ कृषि करने वालों ने गाय की जगह गाडिय़ों को दे दी, जिससे गौमाता बेघर होकर सड़कों पर आ गई। उन्होंने ऋषि, कृषि और कुर्सी (प्रशासन) तीनों से इस चिंतनीय विषय पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस गैया और मैया ने हमें अपने दूध रूपी अमृत से सक्षम बनाया, आज उन्हें सड़कों पर छोडऩा हमारी कृतघ्नता है।
वास्तु दोष से बड़ा है वाक्य दोष
पारिवारिक कलह पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि आज घरों में वास्तु दोष से ज्यादा वाक्य दोष (कड़वी वाणी) है। यही वाणी पारिवारिक प्रेम को खत्म कर रही है। पहले पैसा कम था पर प्रेम ज्यादा था, आज पैसा तो है पर चैन गायब है। महाराज जी ने जोर देकर कहा कि सोने की चैन से ज्यादा, चैन से सोना जरूरी है।
जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। नंद घर आनंद भयो के भजनों पर पूरा पंडाल नृत्य कर उठा। उन्होंने अंत में कहा कि भगवान की कथा ही मानव की व्यथा मिटाने का एकमात्र साधन है।








