इटारसी। आपातकालीन स्थितियों में तुरंत जीवन बचाने की तकनीक को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय, इटारसी द्वारा न्यायालय परिसर में कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. राकेश चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण का संचालन निश्चेतना एवं गहन चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश योना ने अपनी टीम के साथ किया, जिसमें सिस्टर मेबिल सिंह और सिस्टर रंजना ग्लैडविन ने सक्रिय सहयोग दिया। इस विशेष सत्र का मुख्य फोकस कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में बिना देर किए प्राथमिक उपचार प्रदान करने और अमूल्य जीवन को बचाने की तकनीकों पर रहा।
सक्रिय भागीदारी और हैंड्स-ऑन अभ्यास
इस प्रशिक्षण में मुख्य न्यायाधीश, बड़ी संख्या में अधिवक्तागण और न्यायालय परिसर में मौजूद अनेक नागरिकों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने न केवल व्याख्यान को ध्यान से सुना, बल्कि हैंड्स-ऑन अभ्यास (पुतले पर व्यावहारिक प्रशिक्षण) में भी उत्साह दिखाया। इस व्यावहारिक अभ्यास ने सभी प्रतिभागियों को आपातकालीन स्थिति में बिना घबराए, सही तकनीक का उपयोग करने में सक्षम बनाया। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. योना ने विस्तार से बताया कि कैसे सीपीआर की मदद से हृदय गति रुकने पर मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त परिसंचरण को बनाए रखा जा सकता है, जो अस्पताल पहुंचने तक की अवधि में जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
आपातकालीन सहायता में सराहनीय कदम
न्यायालय परिसर में इस तरह के जीवन रक्षक प्रशिक्षण का आयोजन एक सराहनीय और अनुकरणीय कदम माना जा रहा है। यह पहल न केवल न्यायिक और कानूनी समुदाय को आपात स्थिति के लिए तैयार करती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि जीवन रक्षक कौशल सीखना हर नागरिक के लिए कितना आवश्यक है। चिकित्सालय प्रशासन की यह पहल आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता के महत्व को आम जनता तक पहुंचाने और अधिकाधिक लोगों को प्रशिक्षित कर एक सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।








