इटारसी। श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के स्थान परिवर्तन में कथित तौर पर कानूनी प्रावधानों का पालन न किए जाने के विरोध में ‘श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर संघर्ष समिति’ ने आज राज्यपाल, मध्य प्रदेश शासन, को संबोधित एक ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी, इटारसी को सौंपा। समिति ने सकल हिंदू समाज और धर्महित में इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।
ज्ञापन में समिति ने आरोप लगाया है कि आजादी से पूर्व रेलवे भूमि पर स्थापित पीपल के वृक्ष और श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के स्थान परिवर्तन के दौरान, मध्य प्रदेश सार्वजनिक स्थान (धार्मिक भवन एवं गतिविधियों का विनियमन) अधिनियम 2001 एवं 2015 की धाराओं का पालन जिला और स्थानीय प्रशासन तथा स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा नहीं किया गया। समिति का दावा है कि मंदिर को लीज भूमि पर स्थापित कर दिया गया है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
प्रशासन द्वारा किए वादों को तोड़ा गया समिति के अनुसार, स्थान परिवर्तन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने नगर के हिंदू संगठनों से कुछ महत्वपूर्ण वादे किए थे, जिनमें शामिल हैं, लीज भूमि का भू अधिकार पत्र श्री हनुमान जी महाराज के नाम से दिया जाएगा, श्री हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा जिस पूज्य पीपल के वृक्ष से जुड़ी थी, उसे उसी स्थान पर संरक्षण दिया जाएगा, नवनिर्मित मंदिर की सेवा का दायित्व पूर्व समिति के पास ही रहेगा। मंदिर की किसी भी गतिविधि में राजनैतिक हस्तक्षेप नहीं होगा। संघर्ष समिति के संरक्षक गोपाल सोनी और संयोजक राजकुमार मालवीय ने कहा कि एसडीएम कार्यालय से जानकारी मांगने पर पता चला कि इन वादों से संबंधित कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि पूर्व एसडीएम, तहसीलदार, और नगरपालिका ने जिस दबाव में ऐतिहासिक मंदिर के लिए नया मंदिर बनाने में भूमिका निभाई, वह पूरे नगर ने देखा है। आंदोलन की चेतावनी समिति ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा किया एक भी वचन आज तक पूर्ण नहीं हुआ, जिसके कारण हिंदू समाज में रोष बढ़ता जा रहा है। समिति के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 30 दिन की समय सीमा के भीतर मध्य प्रदेश राज्य शासन द्वारा जांच कर दोषी पक्ष पर कार्यवाही नहीं की गई, तो संघर्ष समिति द्वारा जन आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी जबाबदेही के लिए जिला एवं स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा।








