इटारसी। विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को समर्पित शासकीय महात्मा गांधी स्मृति स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एक विशेष संवाद कार्यक्रम ‘मैं अकेला नहीं हूं’ का आयोजन किया। महाविद्यालय स्तरीय टास्क फोर्स ने कार्यक्रम में प्रोफेसरों ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उन्हें मानसिक सुदृढ़ता और अवसाद से बचने गुर सिखाए।
प्राचार्य डॉ. राकेश मेहता के निर्देशन और उच्च शिक्षा विभाग के कैलेंडर के अनुसार आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ. रश्मि तिवारी ने की। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और शासन के निर्देशानुसार गठित यह टास्क फोर्स विद्यार्थियों की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को आश्वस्त किया कि कॉलेज में शिक्षक अभिभावक, आंतरिक शिकायत निवारण समिति और एंटी रैगिंग सेल जैसी व्यवस्थाएं हैं, जहां उनकी पहचान उजागर किए बिना समस्याओं का समाधान किया जाता है?
विशेषज्ञों की राय : लालच और अवसाद से बचें
डॉ. अरविंद कुमार प्रभारी, टास्क फोर्स ने लालच को अवसाद का मूल कारण बताया। तकनीकी रूप से परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि 15 दिन या उससे अधिक समय तक मानसिक परेशानी और असामान्य व्यवहार बना रहे, तो यह अवसाद की श्रेणी में आता है। डॉ. सुशन मनोहर प्रभारी, आनंदम ने नियमित कॉलेज आने और साथियों से संवाद करने की सलाह दी, जिससे समस्याएं गंभीर रूप धारण नहीं कर पातीं। डॉ. सोनू चौरे ने विद्यार्थियों को किसी भी अप्रिय अनुभव को प्रोफेसरों के साथ निर्भीक होकर साझा करने का विश्वास दिलाया। डॉ. सुशीला वरवड़े ने सामाजिक संबंधों के जाल को मानसिक तनाव दूर करने का सशक्त माध्यम बताया।
ऑनलाइन गेम और डिजिटल फ्रॉड पर चर्चा
संचालन कर रहे डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने टास्क फोर्स और आनंदम प्रकोष्ठ को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया। चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने वर्तमान दौर की गंभीर चुनौतियों, जैसे ऑनलाइन गेम और डिजिटल फ्रॉड, को भी मानसिक अवसाद के प्रमुख कारणों के रूप में रेखांकित किया। कार्यक्रम में डॉ. अर्चना शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. एमवी कनकराज, डॉ. विनोद कुमार कृष्ण, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. बसा सत्यनारायण, डॉ. दिनेश कुमार, अमित दीक्षित, डॉ. दुर्गेश लास्गरिया और तकनीकी सहायक कार्तिकेय पटेल उपस्थित रहे। इस सार्थक संवाद में लगभग 250 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।









