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मिक्सोपैथी (Mixopathy) के खिलाफ डॉक्टर्स रहे हड़ताल पर

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निजी अस्पतालों (Private hospitals) में बंद रही ओपीडी (OPD), ठंड में दूर-दराज आए मरीज लौटे

इटारसी। शहर के अधिकतर निजी नर्सिंग होम (Private Nursing Home), क्लीनिक, डायग्नोस्टिक व पैथोलॉजी सेंटर बंद रहे। ठंड में आए मरीजों को इलाज के लिए पड़ा भटकना। अस्पतालों में रूटीन सर्जरी (Routine surgery) भी ठप रही। दूर-दराज से आए लोगों को इलाज नहीं मिला। एलोपैथिक डॉक्टरों (Allopathic doctors) ने आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी का अधिकार देने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डॉक्टरों का यह कदम मरीजों के लिए आफत बन गया। शहर के अधिकतर निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक व एकमात्र पैथोलॉजी सेंटर बंद रहे। अलबत्ता कलेक्शन सेंटर (Albatta Collection Center) हड़ताल से बाहर रहे। डाक्टर्स की हड़ताल से ठंड में इलाज के लिए आए दूर-दराज के मरीजों को वापस जाना पड़ा। वहीं, अस्पतालों में रूटीन सर्जरी भी ठप रही।

मरीजों को नहीं मिला इलाज
शहर में आइएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) से जुड़े करीब 70 डॉक्टर हैं। लगभग दस नर्सिंग होम और लगभग दो दर्जन क्लीनिक हैं। शहर की एकमात्र अंकिता पैथोलॉजी बंद रही अलबत्ता आपात स्थिति में नर्सिंग होम से बुलावा पर जांच अवश्य की गई। कलेक्शन सेंटर इस हड़ताल से बाहर रहे हैं।
शहर के क्लीनिक और नर्सिंग होम पर हर रोज औसतन एक हजार मरीज उपचार कराने आते हैं। इनमें कुछ पर हर रोज ओपीडी सौ-सवा सौ होती है तो कुछ पर 25 से 50 मरीज प्रतिदिन आते हैं। ओपीडी बंद होने से मरीजों को अव्यवस्था से गुजरना पड़ा। दूर-दराज से आए लोगों को इलाज नहीं मिला।

सरकारी अस्पताल खुला रहा
निजी अस्पतालों में ओपीडी भले ही बंद रही मगर मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल के दरवाजे खुले रहे। निजी क्लीनिक बंद होने के बावजूद यहां मरीजों की संख्या में फर्क नहीं आया। कोरोनाकाल में सरकारी अस्पताल में ओपीडी 5 सौ से सिमटकर लगभग सौ हो गयी है, आज भी संख्या लगभग यही रही है।

मरीजों के लिए आयुर्वेद से मिला इलाज
मिक्सोपैथी के विरोध में आईएमए (IMA) के आंदोलन पर रहे तो आयुर्वेद से मरीजों को उपचार मिला है। वैद्य पं. मोहनलाल तिवारी ने बताया कि वे तो उपचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में एकाधिकार और अपने पेशेवर हित को साधने एलोपैथिक चिकित्सकों का संगठन आईएमए झूठा और भ्रामक प्रचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि सर्जरी केवल एलोपैथ की बपौती नहीं है। आयुर्वेद में सर्जरी एलोपैथ के जन्म के बहुत पहले महर्षि सुश्रुत ने लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व की थी। उन्हें विश्व सर्जरी का जनक मानता है। यही कारण है कि न्यूयार्क मेडिकल कॉलेज, रोहतक मेडिकल कालेज व अन्य चिकित्सा संस्थानों में उनकी प्रतिमा स्थापित है। आज एलोपैथी में सर्जरी के जो उपकरण इस्तेमाल करते हैं, वे महर्षि सुश्रुत के बनाये हुए ही हैं, आज के डाक्टर्स को उनको भी छोडऩा चाहिए। यदि देश की विधा को विकसित करने का कदम उठाया जा रहा है तो यह देशहित में ही है, इसका विरोध महर्षि सुश्रुत के शिष्यों का अपमान है।

इनका कहना है….
आयुर्वेद चिकित्सकों को पहले एलोपैथ की तमाम दवाएं लिखने की छूट दी गई। अब सर्जरी का अधिकार दिया जा रहा है। यह मिक्सोपेथी एलोपैथ डॉक्टरों के साथ-साथ मरीजों के लिए भी ठीक नहीं हैं। मरीज भी इलाज को लेकर भ्रमित रहेगा। ऐसे में सरकार फैसले को तुरंत खारिज करे।
डॉ. आर दयाल (Dr. R. Dayal, President IMA)

जो लोग आयुर्वेद का विरोध कर रहे हैं, उनको सर्जरी में उपयोग होने वाले औजार का भी इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। ये औजार भी महर्षि सुश्रुत की ही देन है। यह देश की विधा को विकसित करने से रोकने का प्रयास है और अपने पेशेवर हित साधने के लिए ही इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
पं.मनमोहन तिवारी (Pt. Manmohan Tiwari, Vaidya)

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