इटारसी। शहर के ऐतिहासिक अंजुमन स्कूल परिसर में बीते दिनों हजरत मौला अली के जन्मोत्सव के अवसर पर एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने सांप्रदायिक सौहार्द की नई मिसाल पेश की। समाजसेवी आरिफ खान चिश्ती द्वारा आयोजित इस लंगर एवं कव्वाली कार्यक्रम ने न केवल अकीदतमंदों का दिल जीता, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
कव्वालियों से बंधा शमां, कौमी एकता का संदेश
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मशहूर कव्वालों की प्रस्तुति रही। उन्होंने अपनी रूहानी आवाज में जब देशप्रेम और कौमी एकता की कव्वालियां पेश कीं, तो पूरा पंडाल मौला अली के नारों और तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। रात भर चले इस आयोजन में कव्वाल ने भक्ति और भाईचारे का ऐसा समां बांधा कि दोनों समुदायों के लोग मंत्रमुग्ध नजर आए।
सर्वधर्म सद्भावना का दिखा अद्भुत संगम
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत समाज के हर वर्ग और धर्म की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए गणमान्य नागरिक बशारत खान संरक्षक, सर्व धर्म सद्भावना समिति, अयूब खान सदर, अंजुमन कमेटी इटारसी, पंडित अंकित दुबे संभागीय अध्यक्ष, ब्राह्मण समाज, गजानंद तिवारी, फिरोज खान चिश्ती, नजफ़ अली, गुलाम अली, समाजसेवी संस्था मददगार आर्मी के आरिफ खान का विशेष सम्मान किया, जो मानवता की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
आयोजक आरिफ खान चिश्ती ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश फैलाना है कि हम धर्म से पहले एक इंसान और एक हिंदुस्तानी हैं। उन्होंने सभी शहरवासियों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह आयोजन एक मिसाल बनकर सामने आया।








