- ग्रामीणों ने कहा, इनकम कम है, अब ऐसे में बिल भरें कि पेट
इटारसी। स्मार्ट मीटर की खूबियां बताने आज ग्राम पंचायत सोनासांवरी पहुंचे बिजली अधिकारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने यह कहते हुए विरोध किया कि अधिकारी केवल स्मार्ट मीटर की खूबियां बताने तक सीमित रहे, हमारी समस्याओं को किसी ने नहीं सुना। जिन लोगों के अधिक बिल आ रहे हैं, वे अपनी समस्या लेकर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया, इसलिए ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया और उन्होंने आमसभा का बहिष्कार कर दिया।
तहसीलदार की गाड़ी घेर ली

ग्राम पंचायत भवन से जब बिजली विभाग की टीम तहसीलदान शक्ति सिंह तोमर के साथ निकली तो ग्रामीणों ने उनके वाहन को घेर लिया और रोड जाम करके नारेबाजी शुरु कर दी। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सूचना पर पुलिस पहुंची और टीआई गौरव बुंदेला ने भी ग्रामीणों को समझाने का प्रयत्न किया। ग्रामीण किसी हालत में मानने को तैयार नहीं थे, उनकी एक ही मांग थी कि स्मार्ट मीटर से बिल ज्यादा आ रहे हैं, स्मार्ट मीटर निकाले जाएं। ग्रामीणों में महिलाओं की संख्या अधिक थी, उनको महिला पुलिस के माध्यम से कंट्रोल किया।
बिल भरें कि पेट

एक महिला पूजा भगोरिया ने कहा कि वह झाड़ू पोंछे का काम करके दस हजार रुपए माहवार कमाती है और उनका बिजली का बिल ही पांच हजार रुपए आया है। ऐसे में बिल भरे कि पेट? यहां अधिकारियों को अपनी पीड़ा बताने आये तो अधिकारी केवल स्मार्ट मीटर की खूबियां बताने में इंटरेस्ट ले रहे थे, हमारी समस्या सुनने या स्मार्ट मीटर की खामियां सुनने में उनकी कोई रुचि नहीं थी।
बिल भरने के घंटों बाद चालू की लाइन
ग्राम पंचायत क्षेत्र में रहने वाले कृष्ण कुमार मालवीय ने कहा कि उनके यहां स्मार्ट मीटर लगा है, उनका बिल नहीं भरने पर मीटर बंद कर दिया। रात 9:30 बजे बिल जमा किया, लेकिन लाइन दूसरे दिन दोपहर 1 बजे चालू की गई। ग्रामीण घनश्याम पटेल ने कहा कि स्मार्ट मीटर में कई खामियां हैं, जिनको बताने हम आये तो यहां अधिकारियों ने हमारी नहीं सुनीं, वे तो केवन अपनी ही चलाते रहे। वे स्मार्ट मीटर को सही साबित करने पर तुले थे, न तो हमारी समस्याओं को सुनने में कोई रुचि थी और ना ही उनको हमारी बात सुनना था। इस तरह से एकतरफा बात करने वे आमसभा लगाने आए थे, हमारी नहीं सुनी गई, अब हम ऊपर तक अपनी बात पहुंचाने के लिए जाएंगे।
इनका कहना है….
तहसीलदार साहब की गाड़ी को ग्रामीणों ने घेर लिया था। महिलाएं आगे थीं, महिला पुलिस के माध्यम से कंट्रोल करना पड़ा। हमने तो कहा था कि यदि आप संतुष्ट नहीं है तो आपको एसडीएम से मिलवा देते हैं, तहसीलदार की गाड़ी रोकने का कोई औचित्य नहीं है। समझाने पर ग्रामीणों ने रास्ता दिया।
गौरव सिंह बुंदेला, टीआई








