इटारसी। तृतीय अपर जिला न्यायालय इटारसी ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पूर्वा विकास समिति सुखतवा के अध्यक्ष और सचिव को सरकारी योजना की राशि हड़पने और आदिवासियों के साथ धोखाधड़ी करने का दोषी करार दिया है। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को 7-7 वर्ष के कठोर कारावास और 11-11 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
यह मामला जनपद पंचायत केसला के अंतर्गत एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना से जुड़ा है। वर्ष 2013-14 में आदिवासियों को पशुपालन, कुक्कुट पालन और खाद्य सामग्री हेतु 15 दिवसीय प्रशिक्षण देने के लिए पूर्वा विकास समिति को अनुबंधित किया गया था। इस योजना के तहत 60 हितग्राहियों के लिए 12 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे।
षड्यंत्र के तहत अनियमितताएं
प्रशिक्षण में फर्जीवाड़ा : 15 दिन के निर्धारित प्रशिक्षण के स्थान पर केवल 01 दिन की खानापूर्ति कर पूरे पैसे निकाल लिए गए।
फर्जी दस्तावेज : मृतक व्यक्तियों के नाम पर सहमति पत्र तैयार किए गए और फर्जी अंगूठे के निशान लगाए गए।
सुविधाओं का अभाव : हितग्राहियों को मिलने वाली पाठ्य सामग्री, भोजन, आवास और छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान नहीं किया गया।
फर्जी देयक : वास्तविक व्यय के स्थान पर कूटरचित दस्तावेज लगाकर शासन को चूना लगाया गया।
न्यायालय का निर्णय और सजा
विशेष न्यायाधीश ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पाया कि आरोपियों ने आपराधिक षडयंत्र रचकर मूल्यवान प्रतिभूतियों की कूट रचना की।
दोषी : शारदा प्राणा अध्यक्ष एवं कंछेदी लाल दामले सचिव।
सजा : धारा 467/120बी में 7 वर्ष की जेल। साथ ही धारा 420, 468 और 471 के तहत भी विभिन्न अवधियों की सजा सुनाई।
सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस मामले में तीसरी आरोपी मीना राठौर को साक्ष्यों के अभाव में सभी धाराओं से दोषमुक्त कर दिया है।
शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक एसएन चौधरी और भूरेसिंह भदौरिया ने प्रभावी पैरवी की। प्रकरण के दौरान 267 दस्तावेज सबूत के तौर पर पेश किए गए और 59 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। न्यायालय के फैसले के बाद, जमानत पर चल रहे दोनों आरोपियों के मुचलके निरस्त कर उन्हें तत्काल सजा वारंट के साथ केंद्रीय जेल नर्मदापुरम भेज दिया गया है।









