इटारसी। डीएमओ खाद गोदाम के बाहर यूरिया के लिए किसानों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। प्रशासन के लाख दावों के बावजूद, खाद पाने की आस लगाए किसानों की लंबी कतारें कम नहीं हो रही हैं। हालात इतने खराब हैं कि किसानों को आज भी पुलिस की मौजूदगी में टोकन लेने पड़े, और अब उन्हें एक महीने से भी अधिक समय के इंतजार के बाद यूरिया मिलेगी।
36 दिन बाद मिलेगी खाद

प्रशासन ने एक नोटिस जारी कर बताया है कि जिन किसानों को 4 अगस्त, 2025 को टोकन दिए गए थे, उन्हें अब जाकर यानी 9 सितंबर को यूरिया दी जाएगी। इसका मतलब है कि किसानों को अपनी जरूरत की खाद के लिए पूरे 36 दिन का लंबा इंतजार करना पड़ा है। किसान इस देरी से हताश हैं। वे कहते हैं कि जिस समय फसल को यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस समय खाद नहीं मिल पाती। फसल सूख रही है और उनका भविष्य दांव पर लगा है।
दावों की हकीकत
एक तरफ प्रशासन व्यवस्था को सुचारू बनाने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक महीने पहले लिए गए टोकन आज तक वैध नहीं हो पाए थे। यह स्थिति प्रशासन की लापरवाही और लचर व्यवस्था की पोल खोलती है। किसान पूछ रहे हैं कि जब टोकन वितरण के बाद भी इतना लंबा इंतजार करना पड़ेगा, तो इस व्यवस्था का क्या फायदा? उनके खेतों में खड़ी फसलें इस देरी का खामियाजा भुगत रही हैं, और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर उनकी पीड़ा को कौन समझेगा।
समय निकल गया, तब फायदा क्या
किसानों का कहना है कि खेत में खड़ी फसल को जब यूरिया की जरूरत थी, वह समय तो निकल गया है। किसानों का जो नुकसान होना था, वह हो गया है। अब रही-सही फसल बचाने किसान प्रयास कर रहा है। प्रशासन की यूरिया वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष विजय चौधरी बाबू ने कहा कि अधिकारी सुझावों को भी नहीं सुनते, उनकी वितरण योजना फेल हो चुकी है, काला बाजारी चल रही है।
प्रशासन का दावा खोखला
क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष हरपाल सिंह सोलंकी का कहना है कि किसानों का दुर्भाग्य है, शासन-प्रशासन उनके साथ मजाक कर रहा है। किसान एक बोरी यूरिया तक के लिए परेशान हो रहा है। धान और मक्का की फसल को समय पर यूरिया नहीं मिल पा रही है। इससे अधिक बदतर स्थिति हमने पहले नहीं देखी। प्रशासन का यूरिया की कमी नहीं होने देने का दावा खोखला है।









