इटारसी। नगर की गलियों से निकलकर जब कोई जुनून समाज को संवारने का जिम्मा उठाता है, तो बदलाव की महक दूर तक जाती है। कुछ ऐसी ही कहानी है, प्रियंका मालवीय की, जिनका चयन टिमरनी की प्रसिद्ध तिनका सामाजिक संस्था की फेलोशिप चैंपियंस ऑफ चेंज के लिए हुआ है। अब नर्मदापुरम जिले की कमान संभालते हुए प्रियंका महिलाओं और किशोरियों के जीवन में नई रोशनी भरने के लिए तैयार हैं।
कचरे से कंचन बनाने की सीख
इस सफर की खूबसूरत शुरुआत हुई शासकीय कन्या महाविद्यालय, इटारसी से। यहां प्रियंका ने छात्राओं को एक बहुत ही जरूरी और ईको-फ्रेन्डली हुनर सिखाया, किचन वेस्ट से कंपोस्ट (खाद) तैयार करना। उन्होंने बताया कि कैसे हमारे रसोई घर का कचरा, पौधों के लिए काला सोना बन सकता है।
‘आर्टशाला’: हुनर भी और आजीविका भी
स्टार्टअप डे के मौके पर प्रियंका और वंदना मालवीय ने अपनी ‘आर्टशाला’ के सफर को साझा किया। यह सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है।
- ग्रो बैग्स और हैंडमेड बैग्स : प्रियंका पिछले 5 सालों से सिलाई और कला के मेल से शानदार ग्रो बैग्स बना रही हैं।
- सफलता का आंकड़ा : अब तक वे 5000 से भी ज्यादा बैग्स बेच चुकी हैं।
- महिला सशक्तिकरण : आर्टशाला के जरिए वे न केवल खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर उनके घर का चूल्हा जलाने में मदद कर रही हैं।
‘पौधे सिर्फ गमलों में नहीं, सपनों के साथ ग्रो बैग्स में भी पनपते हैं।’ यह प्रियंका के काम का मूल मंत्र है।
आप भी बन सकते हैं इस बदलाव का हिस्सा
अगर आप भी गार्डनिंग के शौकीन हैं या हस्तशिल्प को बढ़ावा देना चाहते हैं, तो प्रियंका के बनाए ये खास प्रोडक्ट्स ले सकते हैं।
कहाँ मिलेंगें? : इटारसी ऑडिटोरियम में प्रति रविवार को लगने वाले जैविक बाजार में।
प्रियंका की यह पहल साबित करती है कि यदि इरादे नेक हों और हाथों में हुनर, तो एक छोटी सी शुरुआत भी पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकती है।









