इटारसी। सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत अक्सर शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती बनती है, लेकिन केसला ब्लॉक की ग्राम पंचायत ढाबा कला ने एक सराहनीय पहल कर इस धारणा को बदल दिया है। पंचायत से जुड़े गाँव पतलाई में कई वर्षों से जर्जर पड़े सरकारी स्कूल का जीर्णोद्धार किया गया है, जिससे अब गांव के बच्चों को एक बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल पाएगा।
शिक्षा विभाग की उदासीनता के बीच पंचायत ने दिखाई राह
आदिवासी युवा विनोद वारीबा ने कहा कि अक्सर सरकारी स्कूलों की छत टपकती है, दीवारों से प्लास्टर झड़ता है और फर्श टूटे होते हैं। ऐसी खराब स्थितियों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। शिक्षा विभाग हमेशा फंड की कमी का हवाला देता रहा है, लेकिन ढाबा कला ग्राम पंचायत ने अपने संसाधनों का उपयोग कर इस समस्या का समाधान निकाला।

पतलई गांव, जिसे आसपास के क्षेत्र में ‘फौजी फैक्ट्री’ के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां के लगभग हर दूसरे घर से एक युवा भारतीय सेना में सेवा दे रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, गांव की सरपंच श्रीमती फूलंती जितेंद्र इवने ने स्कूल को सुधारने का संकल्प लिया।
आधुनिक डामर शीट से लेकर सुंदर पेंटिंग तक
ग्राम पंचायत ने ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर स्कूल की पूरी मरम्मत कराने का फैसला किया। इस कार्य में सरपंच श्रीमती फूलंती इवने के साथ इंजीनियर श्रीमती नेहा सैनी, एई सुनील धुर्वे और सचिव ज्योति चिमानिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मरम्मत के दौरान, छत पर आधुनिक डामर से बनी चादर लगाई गई ताकि पानी न टपके। टूटी हुई दीवारों पर नया प्लास्टर किया गया और फर्श की भी मरम्मत की गई। इसके अलावा, स्कूल की दीवारों पर सुंदर रंग-रोगन किया गया और बच्चों को प्रेरित करने के लिए प्रेरणादायक विचार भी लिखे गए।
अब यह स्कूल बिल्कुल नए जैसा लग रहा है, जिससे बच्चों को एक साफ और सुंदर वातावरण मिलेगा। सरपंच श्रीमती इवने ने इस पूरे कार्य में सहयोग देने वाले सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद किया है। यह पहल दिखाती है कि अगर स्थानीय स्तर पर इच्छाशक्ति हो, तो सरकारी सुविधाओं में भी बड़ा सुधार किया जा सकता है।









