- प्रसंग वश
कुछ दिन पहले जो हुआ, उस पर सीएम हाउस में फकत छिंद्रावेशन करने वाले कतिपय लोगों ने राजधानी में यह शेर उछाला हो ‘सुना था गालिब उड़ेंगे पुर्जे-पुर्जे, हम भी गए थे पर वह तमाशा न हुआ।’ हो सकता इसके पीछे जाने अनजाने कोई भूल चूक भी रही हो। अथवा कम्युनिकेशन गैप। लेकिन मुख्यमंत्री निवास पर खासी भीड़ इकट्ठा हो गई थी। राजधानी सहित आसपास के कई परेशान हाल लोग 6 तारीख को घोषित मुख्यमंत्री जन दर्शन कार्यक्रम में अखबार में सूचना पढ़कर इकट्ठा हो गए थे।
हैरानी का सबब तब बन गया, जब वहां कोई जवाबदार अफसर इन पीडि़त परेशान हाल लोगों की तकलीफ सुनने जानने के लिए मौजूद नहीं था, और जैसा प्रचारित था वैसा कोई इंतजाम जनदर्शन कार्यक्रम का भी वहां नहीं था। इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खासे नाराज हुए, उन्होंने तत्काल पहुंचकर हालात को संभाल और सहानुभूति से व्यवस्था बहाल की। इसके बाद जनता जनार्दन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए आला अफसर की क्लास ले ली, और सख्त लहजे में यह जता दिया कि इस तरह की लापरवाही और उदासीनता जनहित में भविष्य में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भावी जनदर्शन के लिए उन्होंने बेहतरीन योजना बना दी है और जवाबदार अधिकारियों को उसके लिए मुकाबला कर दिया है, ताकि फिर कोई मुसीबत का मारा व्यक्ति परेशान ना हो। जाहिर है इससे उन लोगों के लिए यह संदेश ही पहुंच गया। यह मोहन भैया हैं, ता-ता थैया नाच नचा देंगे। चूंकि उनकी डायरी में लिखा है, रामकाज कीजे ने बिना मोहे कहां विश्राम। जब राम राज के सन्मार्ग पर चलने का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया है, तो ऐसे अवरोधों से हम विचलित होने वाले नहीं।

जय हिंद जय भारत।
पंकज पटेरिया, वरिष्ठ कवि पत्रकार
संपादक शब्द ध्वज









