इटारसी। नर्मदापुरम वन मंडल में अब तक का सबसे बड़ा अवैध वन कटाई का मामला सामने आया है। इटारसी रेंज की छिपीखापा बीट में वर्ष 2024-25 के बीच 2.5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के गोल्डन टीक सागौन के पेड़ काट दिए गए, जबकि वन विभाग के बड़े अधिकारी लापरवाही बरतते रहे। इस मामले का खुलासा राज्य के उडऩ दस्ते ने किया है, जिसने वन मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) और डीएफओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जांच के बाद हुआ खुलासा
मामले की गंभीरता तब सामने आई जब राज्य वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी मधुकर चतुर्वेदी ने पीसीसीएफ (वन संरक्षण) को शिकायत भेजी। शिकायत मिलने के बाद पीसीसीएफ संरक्षण विभाष ठाकुर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राज्य के उडऩ दस्ते को मौका-मुआयना के लिए नर्मदापुरम भेजा। उडऩ दस्ते ने पांच दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद छिपीखापा बीट में 1290 ठूंठ (1242 सागौन और 48 सतकटा) की गिनती की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, लगभग ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस घटना के 9 महीने बाद जाकर एसडीओ और रेंजर को आरोप पत्र जारी किए जा रहे हैं।
राज्य उडऩ दस्ते की फैक्ट फाइल
- उडऩ दस्ते ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अलग-अलग तारीखों को किए गए निरीक्षण में बड़ी संख्या में ठूंठ पाए गए:
- 9 सितंबर 2025: कक्ष क्र. आरएफ-234 (पुराना आरएफ-112) में 116 सागौन और 14 सतकटा के ठूंठ पाए गए।
- 10 सितंबर 2025: इसी कक्ष में 294 सागौन और 6 सतकटा के ठूंठ मिले।
- 12 सितंबर 2025: पाँच दलों ने निरीक्षण कर 360 सागौन और 5 सतकटा के ठूंठों की गिनती की।
- 13 सितंबर 2025: कक्ष क्र. आरएफ-234 और पीएफ-241 (पुराना पीएफ-97) में 401 सागौन और 7 सतकटा के ठूंठ मिले।
- 14 सितंबर 2025: इन कक्षों और आरएफ-228 (पुराना आरएफ-113) में 71 सागौन और 6 सतकटा के ठूंठ पाए गए।
बड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
वन विभाग के नियमानुसार, 50,000 रुपये तक की हानि पर एसडीओ पर कार्रवाई का प्रावधान है, तो ऐसे में ढाई करोड़ रुपये की भारी हानि पर सीसीएफ अशोक कुमार और डीएफओ मयंक गुर्जर की जवाबदेही क्यों तय नहीं होगी? दोनों अधिकारी क्रमश: अक्टूबर 2024 और मार्च 2024 से नर्मदापुरम में पदस्थ हैं।
बताया गया है कि वन संरक्षक ने 1 फरवरी 2025 और 5 मई 2025 को पत्र लिखकर डीएफओ को सचेत भी किया था, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा, इटारसी और आसपास के जंगलों की सुरक्षा के लिए कोई योजना भी नहीं बनाई गई। इसी लापरवाही का परिणाम है कि अवैध कटाई के साथ-साथ 2 टाइगर और 5 तेंदुओं की मौत के मामले भी सामने आए हैं, जिन पर वरिष्ठ अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं दिखा।









