इटारसी। वृंदावन गार्डन में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गोवर्धन ब्रजभूमि से पधारीं साध्वी राधा देवी ने राजा परीक्षित के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भूलवश भी संतों का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि संत अपराध पर स्वयं भगवान भी क्षमा नहीं करते।
साध्वी ने बताया कि धर्मात्मा राजा परीक्षित से कलयुग के प्रभाव में आकर मुनि समीक के गले में मरा हुआ सर्प डालने का अपराध हुआ, जिसके फलस्वरूप मुनि पुत्र श्रृंगी ने उन्हें सात दिन में मृत्यु का श्राप दिया। मृत्यु के भय से मुक्त होने के लिए राजा परीक्षित ने शुकदेव मुनि के सानिध्य में सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया और अंतत: मोक्ष प्राप्त किया।
थाव्यास ने गुरुनानक देव जी का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भजन न हो सके, तो केवल संत सेवा से ही कल्याण संभव है।
आयोजक समिति के सदस्य जसवीर सिंह छाबड़ा ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक वृंदावन गार्डन में होगी। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक जागरूकता और शांति का संदेश फैलाना है। श्रद्धालुओं के लिए आयोजन स्थल पर व्यापक प्रबंध किए गए हैं।









