इटारसी। आने वाली पीढिय़ों के लिए जल स्रोतों को बचाना अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। जीवनदायी जल के स्रोत लगातार सिमट रहे हैं, जिन्हें सामुदायिक भागीदारी से ही पुनर्जीवित किया जा सकता है। यह बात नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कही।
कलेक्टर और सीईओ के निर्देशन में अभियान
नर्मदापुरम कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना एवं जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन के निर्देशन में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले के विभिन्न तालाबों, बांधों और छोटी नदियों के किनारे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जल संचय के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
आज की आवश्यकता, जल संरक्षण संस्कार
सारिका घारू ने बताया कि बढ़ते शहरीकरण, बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक जल निकाय तेजी से सूख रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अपने आसपास के जल स्रोतों को कचरे और प्रदूषण से मुक्त रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। आने वाली बारिश के पानी को सहेजने के लिए अभी से उपाय अपनाना जरूरी है। जल बचाने की आदत को ‘संस्कार’ के रूप में बच्चों में विकसित करना होगा, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।
सामुदायिक भागीदारी और शपथ
सारिका ने कहा कि जल प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ा विषय है, इसलिए इस अभियान में शासन के साथ-साथ आम जनता की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने जल के महत्व को समझा और जल संरक्षण की सामूहिक शपथ भी ली।








