इटारसी। आज शासकीय महात्मा गांधी स्मृति स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में वसुधैव कुटुम्बकम् की भारतीय अवधारणा विषय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ राकेश मेहता, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉओपी शर्मा, डॉ. अरविंद शर्मा आदि उपस्थित रहे।
प्राचार्य डॉ राकेश मेहता ने कहा कि अयं बंधुर्यन्नेति गणना लघुचेतसाम् 7 उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ (ऋग्वेद, महा उपनिषद 6.72) ‘यह मेरा है’ और ‘वह मेरा नहीं है’ का भेद केवल संकीर्ण सोच वाले लोग ही करते हैं। उत्तम आचरण वाले लोगों के लिए तो सारा विश्व ही एक परिवार है। इस दुनिया में, जहां लोग हमेशा धर्म, नस्ल और देशों की सीमाओं के आधार पर ‘विशिष्ट समूह’ बनाने की कोशिश करते रहते हैं, ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ एक क्रांतिकारी विचार है।
यह ताजी हवा की तरह है, जहां हम सभी के साथ अपने जैसा ही व्यवहार करते हैं। किसी भी परिवार की तरह, हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ये हमें अलग नहीं करते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सार्वभौमिक परिवार की यह सोच नई नहीं है, यह सबसे प्राचीन वेदों से चली आ रही है, इसलिए यह शुरू से ही भारतीय दर्शन का आधार रही है।
डॉक्टर ओपी शर्मा ने बताया कि वसुधैव कुटुंबकम् एक संस्कृत वाक्यांश है जिसका अर्थ है ‘संपूर्ण विश्व एक परिवार है।’ वसुधैव कुटुम्बकम् सनातन धर्म का मूल संस्कार तथा विचारधारा है जो महा उपनिषद सहित कई ग्रन्थों में लिपिबद्ध है। यह वाक्यांश हमें सिखाता है कि हमें सभी मनुष्यों के साथ प्रेम, सम्मान और करुणा के साथ व्यवहार करना चाहिए, चाहे उनकी जाति, धर्म, राष्ट्रीयता या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो।
इस अवसर पर विश्व शांति एवं सौहार्द विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया इस पोस्टर प्रतियोगिता में लिखिता सांगुले प्रथम,अंशिका मालवीय द्वितीय, संगीता जोठे तृतीय रही। इस अवसर पर शिवम मौर्य, संजय चौरे, सरिता कलमें, दुर्गा चौरे, निकिता धुर्वे, सृष्टि जोठे, भारती मौर्य और मुस्कान अहिरवार उपस्थित रहे।









