- प्रतिबंधित पीओपी की मूर्तियां भी बुला ली हैं व्यापारियों ने
- प्रशासन की उदासीनता से हो रहा पीओपी मूर्तियों का स्टॉक
इटारसी। गणेशोत्सव की तैयारी इटारसी में जोर-शोर से शुरू हो गई है। इसी क्रम में, मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों का निर्माण कार्य करीब एक दर्जन स्थानों पर शुरू हो चुका है। इन मूर्तियों की कीमत 300 रुपए से लेकर 20,000 रुपए तक है, जो कारीगरों की मेहनत और कला को दर्शाती है। ये पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियां न केवल इटारसी में, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
एक ओर, जहां लोग पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की मूर्तियों को पसंद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, प्रशासन की ढिलाई के कारण प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की प्रतिबंधित मूर्तियां अभी भी बाजार में बेचने के लिए व्यापारियों ने बुलाकर स्टॉक कर लिया है। प्रशासन की तरफ से इस वर्ष अब तक कोई आदेश नहीं निकाले जाने से ये मूर्तियां बुला ली गई हैं, प्रशासन हर वर्ष की तरह तब आदेश निकालेगा, जब व्यापारी बड़ी संख्या में मूर्तियां बुला लेंगे, ऐसे में उनके खिलाफ मूर्ति जब्ती की कार्रवाई करके व्यापारियों का नुकसान किया जाएगा।

पीओपी की मूर्तियों से नुकसान
पीओपी की मूर्तियां जल स्रोतों में आसानी से नहीं घुलतीं, जिससे जल प्रदूषण होता है और जलीय जीवन को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इन मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंग भी पानी को जहरीला बनाते हैं। पर्यावरण नियमों और प्रतिबंधों के बावजूद, इन हानिकारक मूर्तियों का बिकना एक चिंता का विषय है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि प्रशासन इस ओर से पूरी तरह बेखबर है। यह न सिर्फ कानूनी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण और जन स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वह बाजार में बिकने आने से पहले ही इन मूर्तियों पर तुरंत रोक लगाए और पर्यावरण के अनुकूल गणेशोत्सव को बढ़ावा देने के लिए सख्त कदम उठाए।
कलाकारों को नुकसान
ऑडिटोरियम में मिट्टी की मूर्तियां बना रहे कलाकार अजय प्रजापति का कहना है कि उनके यहां केवल मिट्टी का काम होता है, जो लोग पसंद भी करते हैं। हालांकि पीओपी की मूर्तियां बाजार में आने से उनको नुकसान उठाना पड़ता है, पीओपी की मूर्तियां थोड़ी अच्छी दिखने के कारण लोग उनको पसंद करते हैं, इस बात से बेखबर होकर कि ये पर्यावरण के लिए खतरा हैं। उन्होंने बताया कि उनके यहां से इटारसी, आसपास के ग्रामीण अंचल और खंडवा, हरदा तक मूर्तियां जाती हैं।








