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मंडी Mandi की हड़ताल strike खत्म, कल से होगी खरीद शुरु

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इटारसी। संयुक्त संघर्ष मोर्चा sanyukt sangharsh morcha मप्र मंडी बोर्ड Mandi Board भोपाल Bhopal द्वारा किये जा रहे आंदोलन को मुख्यमंत्री CM के आश्वासन के बाद फिलहाल स्थगित कर दिया है। मंडी सचिव उमेश शर्मा बसेडिय़ा Market Secretary Umesh Sharma Basedia ने किसानों Kisano से आग्रह किया है कि 8 सितंबर मंगलवार से मंडी Mandi में अपनी उपज विक्रय Produce sale के लिए लेकर आएं। संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संरक्षक Patron और मंडी सचिव उमेश कुमार बसेडिय़ा Market Secretary Umesh Sharma Basedia ने कहा कि कृषि मंत्री Minister of Agriculture के आश्वासन के बाद आज 4 बजे हड़ताल strike स्थगित कर दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को सुबह 11 बजे मिलने का समय दिया है। फिलहाल संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने पंद्रह दिन के लिए हड़ताल स्थगत कर दी है। यदि सरकार हमारी मांगें मान लेती हैं तो ठीक है, अन्यथा पुन: हड़ताल प्रारंभ कर दी जाएगी।

पांच दिन से बंद थी मंडियां
मॉडल एक्ट Modal Act के विरोध में 3 सितंबर से मंडियां Mandiya बंद Close थीं। कृषि मंत्री कमल पटेल Agriculture Minister Kamal Patel के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित की है, यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो 15 दिन बाद फिर हड़ताल शुरु हो जाएगी। भोपाल पहुंचे संयुक्त मोर्चा के व्यापारियों ने मॉडल एक्ट सहित मंडी की समस्याओं को लेकर ज्ञापन कृषि मंत्री को सौंपा था। उन्होंने व्यापारियों की समस्या का शीघ्र निराकरण करने का आश्वासन दिया है। अब अनाज व्यापारियों ने आज से मंडी खोलने का निर्णय लिया है। 15 दिनों में यदि राज्य सरकार हमारी समस्याओं का निराकरण नहीं करती है तो फिर से संयुक्त संघर्ष मोर्चा आगे की रणनीति तैयार करेगा। बताया जाता है कि कृषि मंत्री ने मांगो को हल करने का आश्वासन देते हुए सोमवार से प्रदेश की सभी मंडियों में नीलामी प्रारंभ करने को कहा है, हालांकि इटारसी में कर्मचारी आज भी धरने पर रहे थे। मंडी में नीलामी का कार्य मंगलवार से प्रारंभ होगा।

तो मंडी हो जाएगी खत्म
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के कर्मचारियों की ओर से उमेश बसेडिय़ा ने बताया कि मॉडल एक्ट में सरकार ने मंडी क्षेत्र को मंडी प्रांगण घोषित कर दिया है, जिससे मंडी परिसर से बाहर टैक्स नहीं ले सकते, ऐसे में यदि टैक्स नहीं आएगा तो कर्मचारियों की तनख्वाह नहीं होगी और मंडी खत्म हो जाएगी। हमारी मांगें हैं कि कर्मचारियों के वेतन-भत्ते सुरक्षित हों, मंडी बोर्ड सेवा, मंडी समिति सेवा सब एक हो जाएं, वेतन मिले तो सभी को मिले।

ये आशंका है मोर्चा को
मंडियों में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी, तुलावटी, किसान, हम्मालों को नए मंडी एक्ट को लेकर कई प्रकार की आशंकाएं हैं। वे इसे लागू होने के बाद उनका भविष्य अंधकारमय मानते हैं। उनका मानना है कि निजी मंडियों को सरकारी मंडी के दायरे में नहीं रखा तो अनाज खरीदने के बाद किसानों को पैसा नहीं मिलेगा। सरकारी मंडियों में यदि गेहूं दो हजार रुपए क्विंटल बिक रहा है तो निजी मंडियों में व्यापारी 2300 रुपए की खरीद करेंगे, लेकिन पैसे के बदले उन्हें किराना, खाद, बीज, इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने मजबूर करेंगे। जिससे दो हजार का अनाज उन्हें 15 सौ रुपए क्विंटल पड़ेगा। निजी कंपनियां लालच देकर सरकारी मंडियों में न तो अनाज आने देंगी न ही व्यापार होगा। जिससे लाखों मध्यम वर्गीय व्यापारी, हम्माल, तुलावटी बेरोजगार हो जाएंगे। सरकारी मंडियों में व्यापार खत्म होने से मंडी फीस से होने वाली आय भी खत्म होगी। जिससे कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिवार को भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।

इनका कहना है…
संयुक्त संघर्ष मोचा की कृषि मंत्री से चर्चा के बाद आश्वासन मिला है। फिलहाल हड़ताल 15 दिन के लिए स्थगित की है। यह केन्द्र का निर्णय है, जिसे राजस्थान, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने नये प्रावधान के साथ लागू किया है जिससे दोनों सरकारों की बात रहे गयी है। कल सुबह मुख्यमंत्री ने हमारे संगठन के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का समय दिया है, कल बातचीत होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
उमेश बसेडिय़ा, संरक्षक संयुक्त संघर्ष मोर्चा होशंगाबाद

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