इटारसी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78 वीं पुण्यतिथि पर आज किसान आदिवासी संगठन एवं समाजवादी जनपरिषद द्वारा राजनारायण स्मृति भवन (संगठन कार्यालय) में मानवता दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाजसेवियों और संगठन के साथियों ने बापू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके सिद्धांतों को याद किया।
गांधी : एक व्यक्ति नहीं, एक अमर विचार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी जनपरिषद के प्रदेश महामंत्री फागराम ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि गांधी के शरीर को तो 78 साल पहले खत्म कर दिया गया था, लेकिन अब उनके विचारों को भी खत्म करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने मनरेगा जैसी योजनाओं के नाम बदलने को इसी षड्यंत्र का हिस्सा बताया। उन्होंने आह्वान किया कि बुद्ध और गांधी के देश में हमें भेदभाव भूलकर इंसानियत को अपनाना होगा।
वक्ताओं ने रेखांकित किया बापू का जीवन दर्शन
डॉ. समीर खान ने दक्षिण अफ्रीका की उस ऐतिहासिक रेल घटना का जिक्र किया, जिसने गांधी को सत्याग्रह और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। सुश्री तारा वरकड़े ने कहा कि गांधी ने स्वावलंबन के लिए हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का महत्व सिखाया। सम्मरसिंह इवने ने बापू की ग्राम स्वराज की परिकल्पना पर प्रकाश डाला, जिसके कारण ही आज पंचायतों का अस्तित्व है। दुलेश उईके और संपत यादव ने चंपारण आंदोलन और गांधी के आध्यात्मिक दृष्टिकोण को न्याय पाने का एकमात्र रास्ता बताया। कपिल खण्डेलवार संचालक ने कहा कि गांधी स्वराज के माध्यम से ही गांवों में असली खुशहाली देखना चाहते थे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. समीर खान, राधेश्याम मांझी, दुलेश उईके, पूर्व सरपंच सम्मरसिंह इवने, संपत यादव, सरमा, गुलदार, रेशमसिंह, सुमीत, तारा बरकड़े, जगबतीबाई, लक्ष्मीबाई, अर्चना, पूनम, रामबती, कपिल और फागराम उपस्थित रहे। आयोजन का समापन गांधी के अहिंसा के मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ हुआ।










