इटारसी। समाज में जहाँ आज भी शादियाँ भारी-भरकम लेन-देन और दिखावे के बोझ तले दबी हैं, वहीं मध्य प्रदेश के इटारसी से एक ऐसी खबर सामने आई है जो न केवल दिल जीत लेने वाली है, बल्कि कुरीतियों पर करारा प्रहार भी करती है। यहाँ एक विवाह समारोह में दूल्हे और उसके परिवार ने 11 लाख रुपये के तिलक को ठुकरा कर मानवता और सादगी का अनूठा उदाहरण पेश किया है।
लेन-देन नहीं, रिश्तों का सम्मान सर्वोपरि
जानकारी के अनुसार, यह सराहनीय पहल न्यू यार्ड निवासी एडवोकेट जसवंत सिंह राजपूत के पुत्र नमन राजपूत के विवाह समारोह में देखने को मिली। जब दिगवाड़ निवासी वधू पक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़ की सुपुत्री श्रुति ने परंपरा के नाम पर तिलक की रस्म में 11 लाख रुपये भेंट किए जा रहे थे, तब नमन और उनके माता-पिता ने बड़ी विनम्रता से इस बड़ी राशि को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
नमन ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि— “विवाह दो परिवारों के बीच प्रेम, विश्वास और सम्मान का बंधन है, इसे लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।” उन्होंने केवल 101 रुपये और एक नारियल को आशीर्वाद स्वरूप स्वीकार कर रस्म पूरी की।
नई पीढ़ी की नई सोच
समारोह में मौजूद सैकड़ों मेहमान इस दृश्य को देखकर दंग रह गए और पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। उपस्थित लोगों का कहना था कि नमन जैसे युवाओं की यह सोच समाज के लिए एक मशाल की तरह है। एडवोकेट जसवंत सिंह राजपूत के इस निर्णय ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा और संस्कार ही असली धन हैं।
समाज के लिए एक मजबूत संदेश
दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ राजपूत परिवार का यह कदम इटारसी ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक नजीर बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस ‘आदर्श विवाह’ की जमकर तारीफ हो रही है। यह घटना साबित करती है कि यदि युवा पीढ़ी ठान ले, तो समाज से दहेज जैसी कुरीतियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।









