सिवनी मालवा। शासकीय कन्या महाविद्यालय में भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ प्राचीन भारतीय ज्ञान की वैज्ञानिकता को आधुनिक संदर्भों में पुन: स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि माया नारोलिया राज्यसभा सांसद ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रीति शुक्ला भाजपा जिला अध्यक्ष, रितेश जैन नगर पालिका अध्यक्ष, संतोष पारिख प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, नीरज तिवारी नगर मंडल अध्यक्ष, डॉ. उमेश कुमार धुर्वे प्राचार्य शासकीय कन्या महाविद्यालय, विषय विशेषज्ञ डॉ. दशरथ कृष्णजी कापगते नागपुर एवं डॉ. राम प्रकाश पुंडे भोपाल उपस्थित रहे।
सेमिनार के मुख्य अंश और संबोधन
- प्राचार्य का स्वागत भाषण : डॉ. उमेश कुमार धुर्वे ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सेमिनार की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और बताया कि वर्तमान समय में अपनी जड़ों की ओर लौटना क्यों आवश्यक है।
- मुख्य अतिथि का वक्तव्य : राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने कहा कि नई शिक्षा नीति ने वर्तमान पीढ़ी को हमारी प्राचीन समृद्ध विरासत से जोडऩे का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने भारत की प्राचीन वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक विज्ञान के बीच सामंजस्य की आवश्यकता पर बल दिया।
- विशेषज्ञों की राय : डॉ. दशरथ कृष्णजी कापगते ने शैलचित्रों और प्राचीन ग्रंथों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिकता को प्रमाणित किया।
डॉ. राम प्रकाश पुंडे ने बताया कि आयुष मंत्रालय और आईसीएमआर आयुर्वेद एवं योग पर शोध कर रहे हैं, जो भविष्य की जीवनशैली का मुख्य आधार बनेंगे। प्रोफेसर रजनीश जाटव सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. गजेंद्र कुमार वाईकर एवं डॉ. सतीश बालापुरे ने किया। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में प्रोफेसर मनोज कुमार प्रजापति का विशेष योगदान रहा।
नगर पालिका अध्यक्ष रितेश जैन ने सीमित संसाधनों में इतने उच्च स्तरीय आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार की सराहना की। यह सेमिनार न केवल छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक है, बल्कि यह उन्हें भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व की अनुभूति भी कराएगा।









