इटारसी। भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, आज 11 अक्टूबर को ‘जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत के संरक्षण में सम्पन्न हुआ।
अनुसंधान और समाधान पर जोर
वेबिनार समन्वयक डॉ. हिमांशु चौरसिया ने आयोजन की बधाई देते हुए कहा कि वेबिनार अनुसंधान का एक सशक्त माध्यम है, जिससे नए विचार जन्म लेते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विषय मंथन से प्राप्त अमृत सार से विद्यार्थियों का ज्ञानार्जन होगा और भविष्य के लिए समाधान भी प्राप्त होंगे। मुख्य संरक्षक डॉ. कामिनी जैन, प्राचार्य शासकीय गृह विज्ञान (अग्रणी) महाविद्यालय, नर्मदापुरम ने इसे एक समसामयिक विषय बताते हुए कहा कि वर्तमान में हम प्रतिदिन जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं, और विषय विशेषज्ञों के विचारों से विद्यार्थी निश्चित रूप से लाभान्वित होंगे।
ज्वंलत वैश्विक मुद्दे पर मंथन
वेबिनार की संरक्षक एवं प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता वैश्विक परिप्रेक्ष्य में आज एक ज्वंलत और विकराल समस्या है। उन्होंने प्रकृति एवं मानव सभ्यता को बचाने के लिए समाधान निकालने पर ज़ोर देते हुए कहा, ‘प्रकृति के संसाधन सीमित हैं, उपयोग भी सीमित होने चाहिए, इस सत्य को समझना होगा।’ विषय प्रवर्तन पर डॉ. महेंद्र सिंह चौधरी ने जलवायु परिवर्तन से जैव विविधता को होने वाले नुकसान और उसके समाधान पर अपने विचार रखे।
छोटे प्रयासों से संरक्षण संभव
मुख्य वक्ता और विषय विशेषज्ञ डॉ. नील कमल राठौर, शासकीय महाविद्यालय कोटा (राजस्थान), ने झालावाड़ की स्थिति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी हम प्रकृति के संसाधनों को बचा सकते हैं। उन्होंने आधुनिक तकनीकी से पेड़, पानी और भूमि का संरक्षण कर विलुप्त होती जैव विविधता को बचाने पर बल दिया और पारंपरिक पद्धतियों की उपयोगिता को भी आवश्यक बताया।
मानव और वन्य जीवों पर गहरा प्रभाव
विशिष्ट वक्ता डॉ. विजय कुमार यादव, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री रानीचौरी (उत्तराखंड), ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से मानव और वन्य जीव कैसे प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जंगलों की आग, पानी और भोजन की कमी के कारण जीव-जंतुओं के लुप्त होने की कगार पर पहुंचने की स्थिति को स्पष्ट किया। इसके अतिरिक्त, सतना महाविद्यालय से सुनील कुमार सिंह ने ‘बीमारियों से जैव विविधता को हानि’, डॉ. शैलेन्द्र प्रताप ने ‘जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर प्रभाव’ और मैहर महाविद्यालय से गुंजा पंवार ने ‘जलवायु परिवर्तन का पर्यावरण पर प्रभाव’ विषय पर पेपर प्रेजेंटेशन किया।
वेबिनार का सार डॉ. मंजू मालवीय ने प्रस्तुत किया। तकनीकी नियंत्रण डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज एवं आयुष सादराम ने किया। वेबिनार का कुशल संचालन डॉ. सौरभ तिवारी ने किया। श्रीमती कामधेनु पटोदिया ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार से डॉ. राधा आशीष पांडे, डॉ. प्रवीण कुमार कुशवाहा, डॉ. सतीश ठाकरे सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।









