रितेश राठौर, केसला। विकास के नाम पर बिछाए गए राष्ट्रीय राजमार्ग -46 के किनारे अब मौत का सन्नाटा और बदबू पसरी हुई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की घोर लापरवाही के कारण छोड़े गए अधूरे और बिना ढक्कन के नाले ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। आलम यह है कि इन गहरे गड्ढों में गिरकर बेगुनाह पशु तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में महामारी का खतरा मंडरा रहा है।
चार दिन तक नाले में सड़ता रहा बछड़ा
हाल ही में बाजार क्षेत्र में एनएचएआई की कार्यप्रणाली का भयावह चेहरा सामने आया। रात के अंधेरे में एक गाय का बछड़ा खुले नाले में गिर गया। ढक्कन न होने के कारण किसी को उसके गिरने का पता तक नहीं चला। तीन-चार दिनों बाद जब पूरे बाजार में असहनीय दुर्गंध फैली, तब ग्रामीणों ने जांच की। नाले के अंदर बछड़े का शव पूरी तरह सड़ चुका था। ग्रामीणों ने स्लीपर बुलाकर उसे निकालने की कोशिश की, लेकिन दुर्गंध इतनी तीव्र थी कि आसपास के दुकानदारों और रहवासियों का वहां खड़ा होना भी दूभर हो गया।
दुकानदारी ठप, बीमारियों का बढ़ा खतरा
घटनास्थल व्यस्त बाजार क्षेत्र में होने के कारण आमजन का निकलना मुश्किल हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि बदबू के कारण ग्राहक दुकानों पर नहीं आ रहे हैं। वहीं, रहवासियों को डर है कि सड़ते हुए अवशेषों और खुले नालों के कारण क्षेत्र में कोई गंभीर बीमारी न फैल जाए।
ग्रामीणों का तीखा सवाल, यह कैसा विकास है?
एनएचएआई-46 के निर्माण में बरती गई अनियमितताओं पर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। स्थानीय लोगों ने सीधे एनएचएआई पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगह नालों को बनाकर आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है। सुरक्षा के मानकों को ताक पर रखकर नालों को खुला छोड़ दिया गया है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए मौत का जाल हैं। बार-बार की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।
समय रहते सुधारें, वरना होगा बड़ा आंदोलन
ग्रामीणों ने प्रशासन और एनएचएआई से स्पष्ट मांग की है कि सभी अधूरे नालों का निर्माण तत्काल पूरा किया जाए और उन पर मजबूत ढक्कन लगाए जाएं। साथ ही, मृत पशुओं के कारण फैली गंदगी की सफाई कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन मौत के गड्ढों को नहीं भरा गया, तो वे नेशनल हाईवे पर चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।










